पिथौरागढ़ , अप्रैल 17 -- चीन सीमा से सटे सीमांत पिथौरागढ़ जिले में पलायन की समस्या पर नियंत्रण और दूरस्थ क्षेत्रों के समग्र विकास को लेकर प्रशासन ने ठोस पहल शुरू कर दी है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना (एमपीआरवाई) और मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम (एमबीएडीपी) के तहत कुल 17 करोड़ 52 लाख रुपये की योजना तैयार किए गए हैं, जिन्हें शीघ्र ही शासन को भेजा जाएगा।
जिलाधिकारी आशीष कुमार भटगांई की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्तरीय समिति की बैठक में इन योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में परियोजना निदेशक ग्राम्य विकास आशीष पुनेठा द्वारा विभिन्न विभागों और विकासखंडों से प्राप्त प्रस्तावों का पीपीटी के माध्यम से प्रस्तुतीकरण किया गया।
प्रस्तुत योजनाओं में एमपीआरवाई के अंतर्गत 01.2 करोड़ रुपये तथा एमबीएडीपी के अंतर्गत 16.50 करोड़ रुपये की योजनाएं शामिल हैं। इन सभी प्रस्तावों पर अधिकारियों द्वारा विस्तृत विचार-विमर्श किया गया और आवश्यक सुझाव दिए गए।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि आंगनबाड़ी केंद्रों के सौंदर्यीकरण और वहां खेल सुविधाओं के विकास को भी एमपीआरवाई योजना में शामिल किया जाए। उनका कहना था कि इससे दूरस्थ क्षेत्रों में बच्चों के लिए बेहतर वातावरण तैयार होगा और मूलभूत सुविधाएं मजबूत होंगी, जिससे अप्रत्यक्ष रूप से पलायन की प्रवृत्ति पर भी अंकुश लगेगा।
बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि योजनाओं का चयन करते समय दूरस्थ, सीमांत और पलायन प्रभावित गांवों की वास्तविक जरूरतों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यों को प्राथमिकता मिले, जिनसे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित हों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।
उन्होंने विशेष रूप से सड़क, पेयजल, विद्युत, सिंचाई, स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका से जुड़े प्रस्तावों को प्राथमिकता के साथ शामिल करने के निर्देश दिए। साथ ही सभी विभागों को समयबद्ध तरीके से प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए कहा गया, ताकि उन्हें शीघ्र शासन को भेजा जा सके।
बैठक में सीमांत क्षेत्रों में संपर्क मार्गों के निर्माण, पेयजल योजनाओं के विस्तार, लघु सिंचाई परियोजनाओं, पर्यटन विकास, कृषि और उद्यानिकी आधारित योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने कहा कि योजनाओं का चयन स्थानीय जनप्रतिनिधियों और क्षेत्रीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए किया जाए, ताकि अधिकतम लोगों को इसका लाभ मिल सके।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि योजनाओं में गुणवत्ता, व्यवहारिकता और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी डॉ. दीपक सैनी, परियोजना निदेशक ग्राम्य विकास आशीष पुनेठा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
प्रशासन का मानना है कि इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से पिथौरागढ़ में आधारभूत सुविधाओं का तेजी से विकास होगा, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और पलायन की समस्या को कम करने में मदद मिलेगी।
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