तिरुवनंतपुरम , जून 03 -- केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से जुड़े छात्रों के डेटा के उजागर होने की घटना ने मजबूत साइबर सुरक्षा गवर्नेंस और डेटा संरक्षण नियमों के सख्त अनुपालन की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया है। इस बात को लेकर साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों समेत सभी महसूस कर रहे हैं।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ केएस मनोज के अनुसार इस घटना ने साइबर सुरक्षा सुशासन और डेटा गोपनीयता के मुद्दों को केंद्र में ला दिया है, जिससे देश के विकसित होते डिजिटल गोपनीयता ढांचे के तहत संस्थागत जवाबदेही पर महत्वपूर्ण सवाल खड़े हो गये हैं।
उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थान आज छात्रों की पहचान, परीक्षा के रिकॉर्ड, संपर्क विवरण और अन्य संवेदनशील डेटा सहित भारी मात्रा में व्यक्तिगत जानकारी रखते हैं। ऐसी जानकारी डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम 2023 (डीपीडीपी अधिनियम) के तहत सुरक्षित है, जो व्यक्तिगत डेटा को संभालने वाले संगठनों के लिए अनधिकृत पहुंच, प्रकटीकरण, बदलाव या दुरुपयोग को रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय लागू करना अनिवार्य बनाता है।
श्री मनोज के अनुसार, सीबीएसई जैसे सार्वजनिक संस्थान से जुड़े डेटा उल्लंघन (ब्रीच) को केवल एक तकनीकी विफलता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसके बजाय, यह साइबर सुरक्षा सुशासन में संभावित कमजोरियों को उजाकर करता है जिसमें जोखिम प्रबंधन, पहुंच नियंत्रण (एक्सेस कंट्रोल्स), सुरक्षा निगरानी, वेंडर ओवरसाइट (विक्रेता निरीक्षण), घटना प्रतिक्रिया तंत्र (इंसिडेंट रिस्पॉन्स मैकेनिज्म) और नियामक अनुपालन शामिल हैं।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रभावी साइबर सुरक्षा सुशासन के लिए निरंतर खतरे के आकलन, समय-समय पर सुरक्षा ऑडिट, प्राइवेसी-बाय-डिजाइन प्रथाओं और प्रबंधन के उच्चतम स्तरों पर जवाबदेही जरुरी है।
उन्होंने कहा कि डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (डीपीडीपी) अधिनियम के तहत डेटा न्यासियों पर व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा सुनिश्चित करने का वैधानिक दायित्व है। उन्होंने बताया कि यदि जांच में यह पाया जाता है कि डेटा उल्लंघन अपर्याप्त सुरक्षा उपायों या कानूनी प्रावधानों के अनुपालन में कमी के कारण हुआ है, तो नियामक प्राधिकरण मामले की जांच शुरू कर सकते हैं और आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई कर सकते हैं।
यह कानून नियामकों को महत्वपूर्ण वित्तीय दंड लगाने और डेटा सुरक्षा प्रणालियों को मजबूत करने के लिए उपचारात्मक उपायों को अनिवार्य करने का अधिकार भी देता है।
इस घटना को चेतावनी बताते हुए श्री मनोज ने कहा कि साइबर सुरक्षा अब एक सूचना प्रौद्योगिकी के मुद्दे से आगे निकल चुकी है और इसे अब सुशासन, कानूनी और जन विश्वास के मामले के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि करोड़ों नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी का भरोसा पाने वाले संगठनों को डेटा सुरक्षा को एक मौलिक जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार करना चाहिए, जिसके लिए निरंतर निवेश, निगरानी और अनुपालन की आवश्यकता है।.उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे भारत एक डिजिटल-फर्स्ट गवर्नेंस इकोसिस्टम की ओर बढ़ रहा है, बड़ी मात्रा में व्यक्तिगत डेटा को संभालने वाले संस्थानों को साइबर सुरक्षा और गोपनीयता सुरक्षा के प्रति सक्रिय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित