नयी दिल्ली , जून 01 -- कांग्रेस ने सोमवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के 'ऑन स्क्रीन मार्किंग' (ओएसएम) प्रणाली में साइबर सुरक्षा सेंधमारी को लेकर केंद्र सरकार पर अपना हमला तेज कर दिया है। पार्टी ने शिक्षा मंत्रालय से जवाबदेही तय करने की मांग की है और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है।
कांग्रेस महासचिव (संचार प्रभारी) जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सीबीएसई ने शुरुआत में अपने डिजिटल मूल्यांकन मंच में कमियों से इनकार किया था, लेकिन आखिरकार उसने स्वीकार कर लिया कि सिस्टम में सेंधमारी हुई थी।
उन्होंने ठेकेदार कंपनी 'सीओईएमपीटी' की भूमिका पर भी सवाल उठाये और अधिकारियों पर आरोप लगाया कि वे इस कंपनी के खराब प्रदर्शन की चिंताओं के बावजूद उसे बचा रहे हैं।
श्री रमेश ने 'एक्स' पर पोस्ट में कहा, "हफ्तों तक अपने 'ऑन स्क्रीन मार्किंग' प्रणाली में साइबर सुरक्षा कमियों से इनकार करने के बाद सीबीएसई ने आखिरकार स्वीकार कर लिया है कि सिस्टम में सेंधमारी हुई है।"कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि क्या इस सिस्टम को चलाने के लिए जिम्मेदार ठेकेदार के खिलाफ कोई कार्रवाई की जायेगी। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, "लेकिन वह अपने ठेकेदार कंपनी 'सीओईएमपीटी' के खिलाफ क्या कार्रवाई करने की योजना बना रही है? लगता तो नहीं है।"श्री रमेश ने आगे दावा किया कि अनुबंध दिये जाने से पहले टेंडर की शर्तों में किये गये बदलावों से साफ पता चलता है कि वेंडर को बचाने की कोशिश की गयी थी।
उनके अनुसार, अगस्त 2025 में जारी सीबीएसई के 'रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल' (आरएफपी) में उन प्रावधानों को बरकरार रखा गया था, जो प्रभावी ढंग से काम न करने वाले वेंडर्स को ब्लैकलिस्ट करने का बोर्ड को अधिकार देते थे। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि अगले ही महीने जारी एक संशोधन पत्र के जरिये ऐसी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने का बोर्ड का अधिकार हटा दिया गया।
उन्होंने कहा, "ऐसा लगता है कि सीबीएसई और शिक्षा मंत्रालय में बैठे 'सीओईएमपीटी' के मददगारों को पहले से ही अंदाजा था कि ठेकेदार कंपनी इस काम के लायक नहीं होगी।" उन्होंने इस बदलाव को 'सीओईएमपीटी को बचाने का प्रयास और सरकार-समर्थित' बताया, जो कंपनी को औपचारिक रूप से कॉन्ट्रैक्ट मिलने से पहले ही शुरू हो गया था।
यह विवाद उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन के लिए सीबीएसई के उपयोग किये जाने वाले ओएसएम प्रणाली से जुड़ा है, जो देश भर के लाखों छात्रों को प्रभावित करने वाली परीक्षा प्रक्रिया का अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। साइबर सुरक्षा की कमियों और मूल्यांकन प्रक्रिया की शुचिता को लेकर खड़ी हुई चिंताओं ने राजनीतिक आलोचना को हवा दे दी है। इसके बाद विपक्षी दल इस सिस्टम के प्रबंधन और इससे जुड़े कॉन्ट्रैक्ट दिये जाने के मामले में अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
सरकार पर हमले को और तेज करते हुए श्री रमेश ने शिक्षा मंत्रालय पर उन अनियमितताओं को शह देने का आरोप लगाया, जिन्होंने उनके दावे के अनुसार छात्रों को बुरी तरह प्रभावित किया है।
उन्होंने कहा, "देश को कब तक ऐसे 'मंत्री प्रधान' को बर्दाश्त करना पड़ेगा, जिनके मंत्रालय ने अपने टेंडरों में ऐसी अकल्पनीय अनियमितताओं को होने दिया और बढ़ावा दिया, जिससे लाखों छात्रों की मानसिक शांति छिन गयी?"कांग्रेस नेता ने सार्वजनिक पद पर जवाबदेही की कमी का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री पर भी निशाना साधा। श्री रमेश ने कहा, "मंत्री प्रधान को अपने 'राजधर्म' का पालन करना चाहिए और इस्तीफा दे देना चाहिए।"इन आरोपों पर शिक्षा मंत्रालय, सीबीएसई या सीओईएमपीटी की तरफ से फिलहाल कोई त्वरित प्रतिक्रिया नहीं आयी है। बोर्ड ने पहले यह रुख अपनाया था कि वह अपनी परीक्षा और मूल्यांकन प्रणालियों की सुरक्षा और शुचिता सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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