बेंगलुरु , सितंबर 16 -- भारत वाणिज्य ईस्टर्न प्राइवेट लिमिटेड (बीवीईपीएल) के खिलाफ केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की प्राथमिकी दर्ज होने और ठेका दिये जाने से पहले कर्नाटक सरकार को इसकी जानकारी होने के बावजूद कंपनी को 1,000 करोड़ रुपये का केएसएचआईपी सड़क ठेका दिये जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है।

भाजपा ने इस निविदा विवाद को ठेके से जुड़े धन को विदेशों में निवेश करने और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में खर्च किये जाने के आरोपों से जोड़ा है। मामले में सरकार का अपना लिखित जवाब महत्वपूर्ण है। कर्नाटक विधान परिषद में सरकार ने माना है कि ठेका अंतिम रूप से तय किये जाने से पहले उसे बीवीईपीएल के खिलाफ सीबीआई मामले की जानकारी थी।

भाजपा विधान परिषद सदस्य एन. रवि कुमार के सवाल के जवाब में लोक निर्माण विभाग के मंत्री सतीश जारकीहोली द्वारा दिये गये लिखित जवाब के अनुसार, सीबीआई ने 11 जुलाई 2025 को बीवीईपीएल के खिलाफ मामला दर्ज किया था और राज्य सरकार को इसकी जानकारी 24 जुलाई को मिली। इसके बावजूद विभाग ने 17 अक्टूबर 2025 को कंपनी के साथ समझौता किया।

सरकार का कहना है कि सीबीआई का मामला अभी समाप्त नहीं हुआ था और बीवीईपीएल को सरकारी निविदाओं में भाग लेने से प्रतिबंधित नहीं किया गया था। निविदा एक मार्च 2025 को जारी की गयी थी, यानी सीबीआई की प्राथमिकी दर्ज होने से पहले। इसके बाद कर्नाटक राज्य राजमार्ग सुधार परियोजना (केएसएचआईपी) के तहत होसकोटे-मालूर-कोलार-मालूर सड़क गलियारे का ठेका कंपनी को दिया गया।

भाजपा के हमले का मुख्य आधार यही घटनाक्रम है कि बोलीदाता के खिलाफ जांच की जानकारी मिलने के बाद भी क्या औपचारिक रूप से प्रतिबंधित नहीं किये जाने के आधार पर इतने बड़े ठेके को आगे बढ़ाना उचित था।

विवाद को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की नौ और 10 सितंबर को श्री जारकीहोली, उनके परिवार के सदस्यों और सहयोगियों से जुड़े 21 ठिकानों पर की गयी तलाशी के बाद नया आयाम मिला है। रिपोर्टों के अनुसार ईडी ने 3.3 करोड़ रुपये की बेहिसाबी नकदी, विदेशी मुद्रा और ऐसे दस्तावेज जब्त किये हैं, जिनसे लोक निर्माण विभाग के ठेकों में कथित अनियमितताओं और अघोषित विदेशी निवेश के संकेत मिलते हैं।

ईडी लोक निर्माण विभाग के ठेके हासिल करने में कथित रिश्वत के मामले में बीवीईपीएल की भी जांच कर रहा है। एजेंसी यह पता लगा रही है कि ऐसे लेनदेन से कथित तौर पर प्राप्त धन का इस्तेमाल बाद में अफ्रीकी खनन कंपनियों में हिस्सेदारी समेत विदेशों में निवेश के लिए किया गया या नहीं। ये आरोप जांच के अधीन हैं और इन्हें दोष साबित होने के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।

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