रायपुर , अक्टूबर 05 -- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में साइबर ठगों ने खुद को सीबीआई और आईपीएस अधिकारी बताकर 64 वर्षीय किराना दुकानदार को कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसाने का डर दिखाया और 44 दिनों तक 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी स्थिति में रखकर 8.50 लाख रुपये की ठगी कर ली। आरोपियों के दबाव में पीड़ित को रकम जुटाने के लिए अपनी जमा-पूंजी के साथ सोने के जेवर तक बेचने पड़े।

मामला खमतराई थाना क्षेत्र के उरकुरा बजरंग नगर का है। पुलि से आज मिली जानकारी के अनुसार पीड़ित देवसिंह साहू ने पुलिस को बताया कि 18 अगस्त की सुबह करीब नौ बजे उनके पास एक महिला का फोन आया। महिला ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला बताते हुए उनकी बात आदित्य नाम के व्यक्ति से कराई। आदित्य ने उनसे परिवार, जमीन और बैंक खातों से संबंधित जानकारी ली।

इसके बाद बलराज सिंह नाम के व्यक्ति ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताते हुए देवसिंह से पूछताछ शुरू की। कुछ देर बाद वीडियो कॉल के जरिए प्रदीप सिंह नाम के व्यक्ति से बात कराई गई, जिसने खुद को आईपीएस अधिकारी बताया।

आरोपियों ने देवसिंह से कहा कि उनके नाम से आईसीआईसीआई बैंक में 6.80 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग हुई है और उनका नाम इस मामले में शामिल है। ठगों ने कथित रकम का मिलान करने के नाम पर उन्हें अपने खाते से पैसे जमा करने को कहा। ऐसा नहीं करने पर सीबीआई की कार्रवाई करने और परिवार को गिरफ्तार कर ले जाने की धमकी दी गई।

लगातार धमकियों से भयभीत देवसिंह और उनकी पत्नी इंदु साहू को आरोपियों ने वीडियो कॉल के माध्यम से निगरानी में रखा। उनसे हर घंटे वीडियो कॉल पर अपडेट देने के लिए कहा जाता था। दोनों पति-पत्नी को लगातार वीडियो कॉल के सामने बैठे रहने के निर्देश दिए गए। यह सिलसिला करीब 44 दिनों तक चला।

इस दौरान 4 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच देवसिंह ने फोन-पे के जरिए नौ बार में कुल 8.50 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किए। इनमें रिद्धिमा ऑटो और राकेश ट्रेडर्स के खातों में दो-दो लाख रुपये, यूको बैंक में एक लाख रुपये, कैपवाइज ट्रेडिंग टेक्नोलॉजीज प्रा. लि. में एक लाख रुपये, कोटक महिंद्रा बैंक में 50 हजार रुपये, गणेश भंडार में एक लाख रुपये और सृजन लाइफ मैनेजमेंट के खाते में एक लाख रुपये भेजे गए।

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