पटना , जनवरी 23 -- भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या 25 जनवरी को देशभर के जिला मुख्यालयों पर 'संविधान संकल्प-मताधिकार रक्षा दिवस' मनाने का आह्वान किया है।
पार्टी के राज्य सचिव कुणाल ने शुक्रवार को बयान जारी कर कहा है कि देश में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के नाम पर करोड़ों मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से मनमाने ढंग से हटाये जा रहे हैं जो लोकतंत्र और संविधान पर सीधा हमला है।
राज्य सचिव कुणाल ने कहा कि ऐसे समय में चुनाव आयोग की ओर से 25 जनवरी को 'मतदाता अधिकार दिवस' मनाने का आह्वान किया जाना जले पर नमक छिड़कने जैसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकारों के संरक्षण में चल रहे इस अभियान में राजनीतिक दलों को भी शामिल होने के लिये आमंत्रित किया गया है, लेकिन पार्टी की केंद्रीय कमिटी ने इस लोकतंत्र-विरोधी प्रक्रिया में शामिल न होने का स्पष्ट निर्णय लिया है।
उन्होंने बताया कि पार्टी इस अवसर पर संविधान और लोकतंत्र की रक्षा को केंद्र में रखते हुए विरोध कार्यक्रम आयोजित करेगी। कुणाल ने कहा कि मताधिकार कोई दया या औपचारिक उत्सव का विषय नहीं, बल्कि नागरिकों का मौलिक अधिकार है। एसआईआर के नाम पर गरीबों, वंचितों, अल्पसंख्यकों और प्रवासी मजदूरों के नाम मतदाता सूची से हटाकर लोकतंत्र को कमजोर करने की साजिश की जा रही है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।
पार्टी ने ऐलान किया है कि 'संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिये लड़ो- मताधिकार की रक्षा के लिये लड़ो' नारे के साथ 25 जनवरी को देशभर में व्यापक जन-प्रतिरोध दर्ज कराया जायेगा।
सीपीआई (एमएल) ने चुनाव आयोग से मांग की है कि मतदाता सूची से नाम काटने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाये और एक पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था सुनिश्चित की जाये, जिससे लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा हो सके।
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