श्रीनगर , जुलाई 03 -- जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर की बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) ने एक परामर्श में कहा है कि 18 साल से कम उम्र के किसी भी बच्चे का साक्षात्कार , फ़िल्मांकन या रिकॉर्डिंग इस तरह से नहीं की जायेगी जिससे बच्चे की निजता , गरिमा या सुरक्षा से समझौता हो।
गुरुवार को जारी यह परामर्श हाल की उस घटना के बाद आया है, जिसमें स्कूल जाने वाले एक बच्चे का स्कूल परिसर के बाहर साक्षात्कार लिया गया था और बाद में उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था, जिससे बच्चा बड़े पैमाने पर लोगों की नज़र में आ गया और उसे संभावित मनोवैज्ञानिक, भावनात्मक और सामाजिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता था।
समिति ने पहले ही एक स्थानीय न्यूज़ पोर्टल को एक नाबालिग छात्र के वीडियो के मामले में तलब किया है, जिसमें छात्र ने गर्मी की छुट्टियों की घोषणा में देरी को लेकर जम्मू-कश्मीर की शिक्षा मंत्री सकीना इत्तू की आलोचना की थी।
समिति के परामर्श में कहा गया है कि बच्चे एक संवेदनशील वर्ग हैं जिन्हें विशेष देखभाल और सुरक्षा की ज़रूरत होती है, और इस बात पर ज़ोर दिया गया कि उनके साथ कोई भी बातचीत उनके सर्वोत्तम हितों को ध्यान में रखकर की जानी चाहिए।
बच्चों पर मीडिया रिपोर्टिंग के बारे में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की गाइडलाइंस का ज़िक्र करते हुए, इसमें कहा गया है कि बच्चों के साथ साक्षात्कार आम तौर पर माता-पिता या कानूनी अभिभावकों और जहाँ लागू हो, सक्षम अधिकारी की जानकारी पूर्ण सहमति से ही किये जाने चाहिए।
परामर्श में कहा गया, "18 साल से कम उम्र के किसी भी बच्चे का साक्षात्कार , फ़िल्मांकन या रिकॉर्डिंग इस तरह से नहीं की जायेगी जिससे बच्चे की निजता , गरिमा, सुरक्षा या सर्वोत्तम हितों से समझौता हो।"परामर्श में पत्रकारों, व्लॉगर्स और अन्य कंटेंट क्रिएटर्स को माता-पिता और संबंधित स्कूल अधिकारियों से जानकारी पूर्ण सहमति लिए बिना शैक्षणिक संस्थानों के अंदर या आसपास स्कूल जाने वाले बच्चों से संपर्क करने या उनका साक्षात्कार लेने से भी मना किया गया है। इसमें बच्चों को राजनीतिक, कानूनी या अन्य संवेदनशील मामलों पर बयान देने के लिए प्रोत्साहित करने के खिलाफ भी चेतावनी दी गई है, जिससे वे सार्वजनिक आलोचना, ऑनलाइन दुर्व्यवहार, डराने-धमकाने या भावनात्मक नुकसान का शिकार हो सकते हैं।
समिति ने शैक्षणिक संस्थानों को निर्देश दिया कि वे छात्रों, माता-पिता और कर्मचारियों को मीडिया और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के साथ सुरक्षित बातचीत के बारे में जागरूक करें और बच्चों से जुड़ी किसी भी अनधिकृत मीडिया गतिविधि की तुरंत समिति और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को रिपोर्ट करें।
परामर्श में चेतावनी दी गयी है कि बच्चों के अधिकारों, कल्याण और भलाई को प्रभावित करने वाले उल्लंघनों को उचित कानूनी कार्रवाई के लिए साइबर पुलिस या अन्य सक्षम अधिकारियों को भेजा जायेगा, जिसमें कानून के तहत जहां भी संभव हो, आपत्तिजनक डिजिटल सामग्री को हटाना भी शामिल है। यह परिपत्र तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
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