मुंबई , जुलाई 28 -- महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में दर्ज 17 प्रथम सूचना रिपोर्टों की केस-वार समीक्षा में आरोपियों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
इससे पहले केंद्र सरकार ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों को आश्वासन दिया था कि उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।
महाराष्ट्र सरकार के भी इसी तरह का आदेश जारी करने की उम्मीद है। हालांकि, मुंबई पुलिस के सूत्रों का कहना है कि जांच को बीच में नहीं रोका जा सकता और मौजूदा प्रक्रिया के तहत राजनीतिक और सामाजिक विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों को चार्जशीट दाखिल होने के बाद ही वापस लिया जा सकता है। इसलिए प्राथमिकी में नामजद व्यक्तियों को नोटिस देकर जांच अधिकारियों के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया जा रहा है। विरोध प्रदर्शन के दौरान दर्ज की गई प्रत्येक घटना में उनकी विशिष्ट भूमिका का पता लगाने के लिए आरोपियों से अलग-अलग पूछताछ की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने घटनाओं को एक ही मामला मानने के बजाय प्रत्येक प्राथमिकी के लिए अलग जांच रणनीति अपनाई है। जांचकर्ता आरोपियों के बयानों का मिलान सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल फोन वीडियो, सोशल मीडिया पोस्ट, तस्वीरों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से कर रहे हैं, जो उन विभिन्न स्थानों से एकत्र किए गए हैं जहां गड़बड़ी की सूचना मिली थी।
घटनाक्रम का सिलसिलेवार क्रम तैयार करने और कानून-व्यवस्था के उल्लंघन का कारण बनने वाले कृत्यों में कथित रूप से शामिल लोगों की पहचान करने के लिए पुलिस प्रत्यक्षदर्शियों, शिकायतकर्ताओं और विरोध के दौरान तैनात पुलिसकर्मियों के बयान भी दर्ज कर रही है।
सूत्रों ने कहा कि प्रत्येक प्राथमिकी में एकत्र किए गए सबूत आगे की कानूनी कार्रवाई का मार्ग तय करेंगे। अगर जांचकर्ताओं को किसी आरोपी की बड़ी भूमिका का संकेत देने वाले अतिरिक्त सबूत मिलते हैं, तो पूरक धाराएं लगाई जा सकती हैं और सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
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