रायपुर , अप्रैल 16 -- ) छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कार्पोरेशन लिमिटेड (सीजीएमएससी) से जुड़े बहुचर्चित घोटाले में भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो तथा आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (एसीबी-ईओडब्ल्यू) ने गुरुवार को अदालत में पूरक चालान पेश किया।

एसीबी-ईओडब्ल्यू की ओर से पेश 3500 से अधिक पन्नों के इस चालान में चार आरोपियों अभिषेक कौशल, राकेश जैन, प्रिंस कोचर और कुंजल शर्मा को नामजद किया गया है। सभी आरोपी वर्तमान में रायपुर केंद्रीय कारागार में हैं।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह प्रकरण अपराध क्रमांक 05/2025 के तहत दर्ज है, जिसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 409 और 120बी के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 13(1)(ए), 13(2) और 7(सी) के तहत कार्रवाई की जा रही है।

जांच एजेंसी के मुताबिक, राज्य में 'हमर लैब' योजना के तहत विभिन्न शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों जिला अस्पताल, एफआरयू, सीएचसी, प्राथमिक एवं उप स्वास्थ्य केंद्रोंके लिए मेडिकल उपकरणों और रिएजेंट्स की खरीदी प्रक्रिया में अनियमितताएं पाई गईं। आरोप है कि निविदा प्रक्रिया में मिलीभगत और फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से पात्रता सुनिश्चित कर टेंडर हासिल किया गया।

विवेचना में यह भी सामने आया है कि प्रिंस कोचर ( जो रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स प्रा. लि. के लिए लायजनिंग कार्य करता था,)ने संबंधित कंपनियों के बीच समन्वय की भूमिका निभाई। रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स प्रा. लि. तथा श्री शारदा इंडस्ट्रीज ने मोक्षित कार्पोरेशन के साथ मिलकर आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने के उद्देश्य से सहयोग किया। तीनों फर्मों ने उत्पाद विवरण, पैक साइज, रिएजेंट्स और कंज्यूमेबल्स सहित निविदा दस्तावेजों में समान पैटर्न अपनाया तथा दरें भी क्रमबद्ध तरीके से कोट की गईं।

जांच में यह भी उजागर हुआ कि डायसिस इंडिया प्रा. लि. द्वारा निर्धारित एमआरपी से अधिक दरें सीजीएमएससी को भेजी गईं। आरोप है कि कुंजल शर्मा ने मोक्षित कॉर्पोरेशन के पार्टनर शशांक चोपड़ा के साथ मिलकर रिएजेंट्स और कंज्यूमेबल्स की कीमतों में हेरफेर किया, जिसके चलते इन्हें वास्तविक एमआरपी से तीन गुना तक अधिक दरों पर आपूर्ति किया गया। इस अनियमितता से शासन को लगभग 550 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति होने का अनुमान है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित