पटना , मार्च 11 -- बिहार की राजधानी पटना स्थित राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की एक विशेष अदालत ने मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित केंद्रीय आयुध डिपो से एक-47 राइफल की चोरी और बरामदगी के मामले में बुधवार को पांच लोगों को दोषी करार दिया, जबकि नौ लोगों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।
सजा के बिंदु पर सुनवाई 13 मार्च 2026 को होगी। एनआइए के विशेष न्यायाधीश मधुकर सिंह ने मामले में सुनवाई के बाद आरोपित पूर्व फौजी सुरेश ठाकुर, पुरुषोत्तम लाल रजक, नियाजुल रहमान और मोहम्मद इमरान आलम एवं शमशेर आलम को दोषी कर दिया है,जबकि शिवेन्द्र रजक उर्फ शैलेन्द्र रजक, चन्द्रावती देवी, राजीव सिंह उर्फ चुन्नू सिंह, रिजवाना बेगम, मोहम्मद इरफान आलम, मनोज सिंह उर्फ मांजी, मंजर आलम, बजरंग शंकर और मोहम्मद मुर्शीद उर्फ सुरमा को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है।
अधिवक्ता ठाकुर मनीष मोहन ने बताया कि मुंगेर जिले में एक अभियुक्त के पास से एक-47 राइफल की बरामदगी की गई और फिर उसकी निशानदेही के बाद कई और रायफलों की बरामदगी की गई। इस मामले में पहले जमालपुर के मोफस्सिल थाना में कांड संख्या 334/2018 के रूप में पहले प्राथमिकी आईपीसी और यूएपीए एक्ट के विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई थी। बाद में मामला एनआईए को सौंपा गया।
एनआईए की जांच के दौरान बिहार और उत्तर प्रदेश के करीब 12 जगहों पर छापेमारी की गई और लगभग 20 एके 47 राइफलों की बरामदगी की गई थी। जांच में यह भी पता चला कि यह राइफलें मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित केंद्रीय आयुध डिपो से वहां के स्टोर कीपर की मिली भगत से चोरी कर इनकी तस्करी की जाती थी और बिहार एवं अन्य जगहों पर इसे पांच से सात लाख रुपए तक में बेचा जाता था। आयुध डिपो से लगभग 80 एके-47 रायफलों की चोरी हुई थी।एनआईए ने अपनी प्राथमिकी आर सी 31/2018 के रूप में दर्ज की थी।
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