चेन्नई , अगस्त 29 -- चक्रीय अर्थव्यवस्था और सतत विनिर्माण की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए, चेन्नई स्थित सीएसआईआर- केंद्रीय चर्म अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीएलआरआई) ने बेंगलुरु की कंपनी मैसर्स हस्क एंड हाइड के साथ एक लाइसेंसिंग समझौता पर हस्ताक्षर किये हैं। इस समझौते के तहत, कॉफी के छिलके से चमड़ा जैसी सामग्री बनाने की अपनी तकनीक कंपनी को हस्तांतरित की जाएगी।
भारत में लगभग 3.5 लाख टन के कुल कॉफी उत्पादन से प्रतिवर्ष एक लाख टन से अधिक कॉफी का छिलका उत्पन्न होता है। सीएसआईआर-सीएलआरआई की अभिनव "वेस्ट-टू-वेल्थ" प्रक्रिया इस अल्प-उपयोग किए जाने वाले कृषि अवशेष को शून्य तरल और शून्य ठोस अपशिष्ट निर्वहन मॉडल पर आधारित उच्च-मूल्य वाली लाइफस्टाइल सामग्रियों में परिवर्तित करती है।
कर्नाटक देश में सबसे ज़्यादा कॉफ़ी का उत्पादन करता है, इसलिए बेंगलुरु की कंपनी के साथ यह साझेदारी खेती से निकलने वाले कचरे के इस्तेमाल के लिए व्यावसायिक अवसर पैदा करेगी।
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