रांची , जनवरी 25 -- झारखंड के जमशेदपुर में स्थित सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (सीएसआईआर-एनएमएल) में भारत का 77 वाँ गणतंत्र दिवस अत्यंत राष्ट्रभक्ति, उत्साह एवं गरिमामय वातावरण में मनाया गया।
आयोजित इस समारोह में संस्थान के अधिकारियों, कर्मचारियों, उनके परिवारजनों, विद्यार्थियों तथा गणमान्य अतिथियों ने सहभागिता कर राष्ट्र की स्वतंत्रता, लोकतांत्रिक मूल्यों एवं राष्ट्रीय उन्नति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को सुदृढ़ किया।
समारोह के दौरान संस्थान के निदेशक, डॉ. संदीप घोष चौधुरी ने अद्वितीय योगदान देने वाले सेवानिवृत्त लांस नायक (एलएनके) मंजीत कुमार झा को सम्मानित कर उनके शौर्य, साहस एवं राष्ट्रसेवा को नमन किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. संदीप घोष चौधुरी द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराने के साथ हुआ, जिसके उपरांत राष्ट्रगान का सामूहिक गायन किया गया। तत्पश्चात निदेशक महोदय का प्रेरक संबोधन प्रस्तुत किया गया। अपने संबोधन में निदेशक महोदय ने स्वतंत्रता के महत्व, स्वतंत्रता सेनानियों के अमूल्य बलिदानों तथा राष्ट्र निर्माण में वैज्ञानिक संस्थानों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए सभी को कर्तव्यनिष्ठा एवं राष्ट्रीय चेतना के साथ कार्य करने का आह्वान किया।
इस गौरवपूर्ण अवसर पर डॉक्टर चौधुरी ने वैज्ञानिकों , अभियंताओं, शोधार्थियों, अधिकारियों तथा कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि 26 जनवरी केवल एक तिथि नहीं है; यह भारत की आत्मा, उसकी संवैधानिक चेतना और वैज्ञानिक विवेक का उत्सव है। यह वह दिन है जब भारत ने स्वयं को केवल राजनीतिक रूप से नहीं, बल्कि बौद्धिक, नैतिक और वैज्ञानिक रूप से भी स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में घोषित किया।
उन्होंने कहा कि आज, जब मैं इस मंच से सीएसआईआर-एनएमएल के परिवार को संबोधित कर रहा हूँ, तो मुझे गर्व है कि हम सभी उस गौरवशाली संस्था के अभिन्न अंग हैं जो 1950 से निरंतर राष्ट्र निर्माण के वैज्ञानिक यज्ञ में आहुति दे रही है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता समय की पुकार है। प्रधानमंत्री के "आत्मनिर्भर भारत" के संकल्प में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भूमिका सर्वोपरि है।
आत्मनिर्भरता का अर्थ आत्मकेन्द्रित होना नहीं, बल्कि स्वदेशी ज्ञान, स्वदेशी तकनीक और वैश्विक नेतृत्व है। उन्होंने स्मरण दिलाया कि आज भारत को- रणनीतिक धातुओं में आत्मनिर्भर बनना है ,ऊर्जा संक्रमण के लिए नवीन सामग्री विकसित करनी है तथा हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर, रक्षा, अंतरिक्ष और हरित प्रौद्योगिकी में वैश्विक मानक स्थापित करने हैं और इन सभी लक्ष्यों की धुरी -वैज्ञानिक नवाचार है। सीएसआईआर-एनएमएल केवल एक प्रयोगशाला नहीं है- यह भारत की औद्योगिक आत्मा का धातुकर्मीय आधार है।
उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि हम अपने शोध को- प्रयोगशाला से उद्योग तक ,शोध पत्र से उत्पाद तक और विचार से प्रभाव तक ले जाएँ। इस अवसर पर उन्होंने युवा वैज्ञानिकों को प्रेरित करते हुए कहा कि आप सभी भारत के भविष्य के शिल्पकार हैं। उन्होंने स्मरण दिलाते हुए कहा कि हमारा प्रत्येक प्रयोग, प्रत्येक पेटेंट और प्रत्येक नवाचार भारत की संप्रभुता और समृद्धि से जुड़ा है। उन्होंने अंत में सभी का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि हम विज्ञान को सेवा ,नवाचार को संस्कार और आत्मनिर्भर भारत को अपना मिशन बनाएँगे |निदेशक के संबोधन के उपरांत लीना साहू तथा वाई ऊषा द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, देशभक्ति गीत तथा एन एम एल केरला पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों द्वारा मनमोहक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए।
कार्यक्रम की रूपरेखा को तय करने एवं सफलतापूर्वक इसके निर्वहन के लिए प्रयोगशाला के प्रशासन नियंत्रक जयशंकर शरण ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने इस कार्यक्रम को अपनी लगन और निष्ठा से स्मरणीय तथा प्रेरक बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित वार्षिक क्रिकेट प्रतियोगिता एवं खेल दिवस सहित विभिन्न गतिविधियों में कर्मचारियों एवं बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर समारोह को और अधिक जीवंत एवं स्मरणीय बना दिया।
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