नयी दिल्ली , फरवरी 18 -- वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की प्रयोगशाला नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरडिसिप्लीनरी साइंस एंड टेक्नोलॉजी (एनआईआईएसटी) के वैज्ञानिकों ने मौजूदा समय में बढ़ रहे मधुमेह और उच्च रक्तचाप की समस्या से निपटने के लिए प्रोटीन तथा फाइबर से भरपूर चावल और कम सोडियम वाला नमक विकसित किया है।
सीएसआईआर की महानिदेशक एन. कलाईसेल्वी की मौजूदगी में एनआईआईएसटी के निदेशक सी. आनंदा रामकृष्णन ने टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के वैश्विक अनुसंधान प्रमुख विकास गुप्ता को इन प्रौद्योगिकियों का हस्तांतरण किया। विभिन्न कंपनियों को कुल सात प्रौद्योगिकियों का हस्तांतरण किया गया और एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किये गये।
डॉ. रामकृष्णन ने बताया कि वर्तमान समय में देश में मधुमेह और उच्च रक्तचाप की बीमारी काफी बढ़ गयी है। एनआईआईएसटी ने एक ऐसी प्रौद्योगिकी विकसित की है जिससे किसी भी चावल में स्टार्च की मात्रा कम की जा सकती है और प्रोटीन की मात्रा बढ़ायी जा सकती है। इस चावल में 25 प्रतिशत प्रोटीन होगा जो सामान्य चावलों के मुकाबले तीन गुना है। स्टार्च की मात्रा कम रहने से डाइबिटीज का खतरा भी कम होगा। इसके अलावा यह चावल आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन बी12 और फाइबर से भी भरपूर होगा। टाटा कंज्यूमर और तिरुपुर की कंपनी एसएस सोल फूड को यह प्रौद्योगिकी हस्तांतरित की गयी।
वैज्ञानिकों ने कम सोडियम वाला नमक भी तैयार किया है। इसमें सोडियम की मात्रा को 86 प्रतिशत कम करने के बावजूद इसके स्वाद को बरकरार रखा गया है। टाटा कंज्यूमर इसे आयरन और आयोडीन से फोर्टिफाइ करके बाजार में उतारेगी।
एनआईआईएसटी ने दूध वाली कॉफी की तरह ही एक्सप्रेसो कॉफी में लंबे समय तक सतह पर झाग बनाये रखने का तरीका भी खोज निकाला है। श्री रामकृष्णन ने बताया कि एनआईआईएसटी ने ऐसा तरीका विकसित किया है जिससे कॉफी पाउडर के अणुओं के बीच गैस को रोककर रखा जा सके। जब कॉफी पाउडर तरल के संपर्क में आता है तो यह गैस धीरे-धीरे निकलनी चाहिये ताकि सतह पर झाग बना रहे और उच्च तापमान बना रहे। उन्होंने बताया कि इस कॉफी पाउडर के साथ वैज्ञानिकों ने लंबे समय तक 95 डिग्री सेल्सियस का तापमान बनाये रखने में सफलता पायी है। यह प्रोद्यौगिकी भी टाटा कंज्यूमर को हस्तांतरित की गयी है।
अन्य हस्तांतरित प्रौद्योगिकियों में पेड़-पौधों से बने चमड़े का विकल्प भी शामिल है। इस परियोजना के लिए राष्ट्रीय अनुसंधान विकास परिषद (एनआरडीसी) प्रौद्योगिकी लेने वाली कंपनी को वित्तीय मदद भी मुहैया करायेगा।
एनआईआईएसटी ने प्लास्टिक के हरित विकल्प, पकाने के लिए तैयार वेजेटेबल मिक्स और फ्रूट रोलअप की प्रौद्योगिकियों का भी हस्तांतरण किया है। जैविक कूड़े के निपटारे के लिए 'जैवम' के नाम से बनायी गयी मशीन के लिए भी प्रौद्योगिकी हस्तांतरण किया गया।
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