रांची , जुलाई 31 -- झारखंड के सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (सीएसआईआर-एनएमएल), जमशेदपुर द्वारा केंद्रीय पब्लिक स्कूल, जमशेदपुर के विद्यार्थियों के लिए सीएसआईआर-जिज्ञासा पहल के अंतर्गत एक दिवसीय छात्र भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना तथा उन्हें अनुसंधान एवं नवाचार से परिचित कराना था। कार्यक्रम में कुल 121 विद्यार्थियों (69 बालक एवं 52 बालिकाएँ) तथा 6 शिक्षकों ने भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ पंजीकरण के उपरांत एमटीई प्रभाग के वरिष्ठतम वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. एस. शिवप्रसाद के उद्घाटन संबोधन से हुआ। उन्होंने विद्यार्थियों को वैज्ञानिक सोच एवं जिज्ञासा विकसित करने के लिए प्रेरित किया तथा सीएसआईआर-एनएमएल की विभिन्न अनुसंधान गतिविधियों से अवगत कराया।

इसके पश्चात डॉ. के. गोपाला कृष्णा, प्रमुख, आईएमडीसी प्रभाग ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए राष्ट्रीय विकास में धातुकर्म एवं पदार्थ विज्ञान अनुसंधान की भूमिका पर प्रकाश डाला। इसके बाद डॉ. अनिमेष जाना, वैज्ञानिक-डी एवं परियोजना प्रमुख, ने सीएसआईआर-जिज्ञासा कार्यक्रम के उद्देश्यों की जानकारी दी तथा विद्यार्थियों को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों ने क्रीप अध्ययन, एडवांस्ड एनालिटिकल कैरेक्टराइजेशन, ई-वेस्ट पुनर्चक्रण तथा मेल्टिंग डेमॉन्स्ट्रेशन सुविधाओं का भ्रमण किया। इस दौरान वैज्ञानिकों एवं तकनीकी कर्मचारियों ने विभिन्न अनुसंधान गतिविधियों, उनके अनुप्रयोगों तथा सामाजिक महत्व के बारे में जानकारी दी।

विद्यार्थियों को डॉ. एम. प्रेम कुमार एवं डॉ. निखिल कुमार द्वारा आयोजित वैज्ञानिक प्रदर्शन एवं संवाद सत्र में भाग लेने का अवसर भी मिला। इस सत्र ने विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति उत्साह एवं जिज्ञासा को और बढ़ाया।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में डॉ. के. गोपाला कृष्णा ने "विज्ञान : भविष्य की परिकल्पना - भविष्य के जीवन की एक दूरदर्शी झलक" विषय पर लोकप्रिय व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को भविष्य की प्रौद्योगिकियों और उनके प्रभावों के प्रति जागरूक किया।

कार्यक्रम का समापन विद्यार्थियों एवं शिक्षकों की उत्साहपूर्ण प्रतिक्रियाओं के साथ हुआ। प्रतिभागियों ने वैज्ञानिकों से प्रत्यक्ष संवाद एवं प्रयोगशाला भ्रमण के अनुभव की सराहना की। इस अवसर को स्मरणीय बनाने हेतु एक सामूहिक छायाचित्र भी लिया गया।

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