रांची , अगस्त 27 -- झारखंड में सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (सीएसआईआर-एनएमए), जमशेदपुर द्वारा सीएसआईआर-जिज्ञासा पहल के अंतर्गत लोयोला स्कूल, बिष्टुपुर के विद्यार्थियों के लिए एक दिवसीय छात्र भ्रमण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना तथा अनुसंधान एवं नवाचार के प्रति रुचि जागृत करना था।

इस कार्यक्रम में 83 विद्यार्थियों (49 लड़के एवं 34 लड़कियाँ) तथा 3 शिक्षकों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ. एस. शिवप्रसाद, वरिष्ठतम मुख्य वैज्ञानिक एवं प्रमुख, एमटीई प्रभाग के संबोधन से हुआ। उन्होंने विद्यार्थियों को सीएसआईआर-एनएमएल की विभिन्न गतिविधियों से परिचित कराया तथा प्रयोगशाला में अनुसंधान से लेकर प्रौद्योगिकी विकास तक की संपूर्ण प्रक्रिया को सरल ढंग से समझाया। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक अनुसंधान किस प्रकार उद्योगों एवं समाज की आवश्यकताओं के अनुरूप नई सामग्रियों और प्रौद्योगिकियों के विकास में योगदान देता है।

प्रतिभागियों का स्वागत डॉ. के. गोपाला कृष्णा, वैज्ञानिक-जी एवं प्रमुख, आईएमडीसी प्रभाग ने किया। उन्होंने विभिन्न प्रकार के इस्पात एवं मिश्रधातुओं तथा उनके दैनिक जीवन में उपयोगों पर प्रकाश डाला। उन्होंने दैनिक जीवन के उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि किसी विशेष उपयोग के लिए सामग्री का चयन उसके गुणों के आधार पर किया जाता है। साथ ही, उन्होंने राइट बंधुओं के नवाचार का उल्लेख करते हुए बताया कि वैज्ञानिक सिद्धांतों एवं उपयुक्त सामग्रियों की भूमिका तकनीकी प्रगति में कितनी महत्वपूर्ण होती है।

इसके पश्चात डॉ. अनिमेष जना, वैज्ञानिक-ई एवं जिज्ञासा कार्यक्रम प्रमुख ने एक इंटरैक्टिव प्रस्तुति के माध्यम से सीएसआईआर-जिज्ञासा कार्यक्रम का परिचय दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को स्टेम क्लब सहित सीएसआईआर द्वारा संचालित विभिन्न छात्र-केंद्रित पहलों एवं अवसरों की जानकारी दी, जिनका लाभ उठाकर विद्यार्थी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपनी रुचि को और विकसित कर सकते हैं।

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण प्रयोगशालाओं का भ्रमण था, जहाँ विद्यार्थियों ने क्रिप, एएसी, ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग, एन डी टी तथा मेल्टिंग डेमोंस्ट्रेशन सुविधाओं का अवलोकन किया।

विद्यार्थियों को डीआईवाई किट तथा जल-विभाजन प्रयोग का भी प्रदर्शन दिखाया गया। कार्यक्रम का समापन एक रोचक प्रश्नोत्तरी (क्विज़) के साथ हुआ। विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने वैज्ञानिकों के साथ संवाद तथा प्रयोगशाला गतिविधियों को प्रत्यक्ष रूप से देखने के अवसर की सराहना की।

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