कोच्चि/नयी दिल्ली , सितंबर 24 -- केरल के कोच्चि स्थित केंद्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (सीएमएफआरआई) ने देश के उपभोक्ताओं को सलाह दी है कि वे किसी खास भौगोलिक क्षेत्र की मछलियों में परजीवी (पैरासाइट) संक्रमण मिलने की खबरों के आधार पर टूना या बाजार में मिलने वाली अन्य मछलियों का सेवन बंद न करें।
संस्थान ने गुरुवार को केंद्रीय कृषि मंत्रालय की तरफ से जारी एक आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि भारतीय तटों पर जांची गयी टूना और अन्य मछलियों में किसी भी प्रकार के हानिकारक परजीवी संक्रमण के बाहरी लक्षण नहीं मिले हैं, इसलिए विदेशी जलक्षेत्र के अध्ययनों को भारतीय जलक्षेत्र की मछलियों पर लागू नहीं किया जाना चाहिए।
यह सलाह ब्राजील के निकट अटलांटिक महासागर में स्किपजैक टूना मछलियों पर किये गये एक अध्ययन के बाद जारी की गयी है, जिसमें परजीवी मिलने की पुष्टि हुई थी।
इस पर स्थिति स्पष्ट करते हुए सीएमएफआरआई के निदेशक डॉ ग्रिन्सन जॉर्ज ने बताया कि परजीवियों की मौजूदगी और उनकी संख्या विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों, पारिस्थितिक स्थितियों और इंटरमीडिएट होस्ट (जैसे कोपपोड्स) की उपलब्धता पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि संस्थान के वैज्ञानिक नियमित रूप से बायोलाजिकल अध्ययन के तहत मछलियों की जांच करते हैं और भारतीय जलक्षेत्र से ली गयी, जांच प्रतियों में कोई असामान्यता या हानिकारक परजीवी संक्रमण नहीं देखा गया है।
संस्थान ने यह भी बताया कि वैश्विक स्तर पर परजीवियों की मौजूदगी के बदलावों का उपयोग मछली के विभिन्न स्टॉक या आबादी की पहचान करने वाले संकेतक के रूप में किया जाता है। इसलिए किसी एक भौगोलिक क्षेत्र के निष्कर्षों को खुद से ही ही दूसरे क्षेत्र की उसी प्रजाति की मछली पर लागू नहीं किया जा सकता।
खाद्य सुरक्षा के दृष्टिकोण से संस्थान ने सलाह दी है कि मछली को साफ करते समय उसकी आंतों और अंदरूनी अंगों को तुरंत निकाल देना चाहिए। इसके अलावा, सही तरीके से पकाने पर परजीवी पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम समाप्त हो जाते हैं। सीएमएफआरआई ने यह भी उल्लेख किया कि कुछ देशों में कच्चा या हल्का पका हुआ सीफूड खाने की परंपरा के कारण जोखिम अधिक हो सकता है, जबकि भारत में समुद्री भोजन को आमतौर पर तेज आंच पर अच्छी तरह पकाकर खाया जाता है, जो पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
संस्थान ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे निराधार आशंकाओं के कारण पौष्टिक सीफूड का सेवन बंद न करें, बल्कि इसे सही तरीके से संभालने, साफ करने और पकाने के मानकों का पालन करते हुए अपनी खुराक में शामिल रखें।
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