बैतूल , जुलाई 24 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय की टेंडर प्रक्रिया एक बार फिर विवादों में आ गई है। मेनपावर, सफाई कर्मचारियों, सुरक्षा गार्ड तथा किराए के वाहनों के अनुबंध जिला स्वास्थ्य समिति की स्वीकृति के बिना बढ़ाने के आरोप लगाए गए हैं। आरोपों के अनुसार इस मामले में वित्तीय नियमों के उल्लंघन और करोड़ों रुपये के भुगतान की आशंका जताई गई है।
सूत्रों के अनुसार सीएमएचओ कार्यालय ने एक अगस्त 2024 को मेसर्स जूस इंटरप्राइजेस, भोपाल को जिले की स्वास्थ्य संस्थाओं में सफाई, सुरक्षा एवं मेनपावर उपलब्ध कराने का एक वर्ष का कार्यादेश जारी किया था। यह अनुबंध एक अगस्त 2024 से 31 जुलाई 2025 तक प्रभावी था। इसके तहत 10 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं अन्य स्वास्थ्य संस्थानों के लिए 163 कर्मियों की सेवाएं उपलब्ध कराई जानी थीं।
आरोप है कि अनुबंध अवधि समाप्त होने के बाद भी नई निविदा जारी किए बिना अथवा जिला स्वास्थ्य समिति से अनुमोदन प्राप्त किए बिना संबंधित कर्मचारियों से कार्य लिया जाता रहा। आरोपों के अनुसार नियमानुसार समिति की स्वीकृति के बाद ही छह-छह माह के लिए अनुबंध बढ़ाया जा सकता था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया और कर्मचारियों को मानदेय का भुगतान जारी रहा।
इसी प्रकार किराए के वाहनों के संबंध में भी अनियमितता के आरोप लगाए गए हैं। जानकारी के अनुसार सीएमएचओ कार्यालय ने मेसर्स आयुषी टूर एंड ट्रेवल्स, भोपाल के साथ वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए 25 वाहनों का अनुबंध किया था। इनमें सीएमएचओ कार्यालय के लिए पांच तथा जिले के 10 विकासखंडों के लिए दो-दो वाहन शामिल थे। यह अनुबंध 16 सितंबर 2024 से 15 सितंबर 2025 तक प्रभावी था।
आरोप है कि अनुबंध अवधि समाप्त होने के बाद भी जिला स्वास्थ्य समिति अथवा कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति से अनुमोदन लिए बिना ही सभी 25 वाहनों का संचालन जारी रखा गया तथा संबंधित फर्म को लाखों रुपये का भुगतान किया गया। सूत्रों का दावा है कि इस अवधि में वाहनों के किराए के रूप में लगभग 70 से 80 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है।
सूत्रों के अनुसार दस लाख रुपये से अधिक मूल्य के अनुबंधों के लिए जिला स्वास्थ्य समिति की स्वीकृति अनिवार्य होती है। ऐसे में बिना अनुमोदन के अनुबंध अवधि बढ़ाकर भुगतान किया जाना वित्तीय नियमों के उल्लंघन का मामला हो सकता है।
सूत्रों ने यह भी दावा किया है कि कथित अनियमितताओं में सीएमएचओ कार्यालय के लेखा अधिकारी की भूमिका की भी जांच की आवश्यकता है। इसके अलावा जिला अस्पताल में लॉन्ड्री, किचन तथा बायो-मेडिकल वेस्ट प्रबंधन से जुड़े टेंडरों की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है।
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