नयी दिल्ली , अक्टूबर 18 -- केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है जो आगामी एक नवंबर से लागू होगा जिसमें बल की कमान और निगरानी व्यवस्था को क्षेत्र के बजाय काम के आधार पर बदला गया है। बल ने इस बदलाव के लिए गृह मंत्रालय की मंजूरी ले ली है।
बल की ओर से रविवार को बताया गया है कि इससे बिजली, कोयला, स्टील, पेट्रोलियम, बंदरगाह और सरकारी इमारतों जैसे अहम प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए अलग-अलग विशेषज्ञता विकसित होगी। साथ ही, सुरक्षा के नियमों में एकरूपता और संबंधित विभागों के साथ तालमेल बेहतर करने में मदद मिलेगी।
नए ढांचे में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सेक्टर को सरकारी भवन, संग्रहालय, स्मारक और एम आर टी एस सेक्टर बनाया गया है। नॉर्थ सेक्टर को पावर-I, कोलकाता के नॉर्थ ईस्टर्न सेक्टर-II को पावर-II, रांची के ईस्टर्न सेक्टर को कोयला और भिलाई के सेंट्रल सेक्टर को स्टील सेक्टर बनाया गया है। गुवाहाटी के नॉर्थ ईस्टर्न सेक्टर को पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस सेक्टर का नाम दिया गया है।
बंदरगाहों की सुरक्षा के लिए मुंबई के वेस्टर्न सेक्टर को वेस्ट कोस्ट पोर्ट और चेन्नई के साउथ सेक्टर को ईस्ट कोस्ट पोर्ट सेक्टर बनाया गया है। वहीं, डी ए ई एवं डी ओ एस सेक्टर और दोनों एयरपोर्ट सेक्टर पहले की तरह काम के आधार पर बनी व्यवस्था में काम करते रहेंगे।
यह बदलाव ऐसे समय में किया गया है, जब बल को बंदरगाहों की सुरक्षा के लिए मान्यता प्राप्त सुरक्षा संगठन बनाया गया है। बल को जम्मू-कश्मीर की अति-संवेदनशील जेलों की सुरक्षा और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की हवाई सुरक्षा की जिम्मेदारी भी मिली है। बल साइबर सुरक्षा, ड्रोन और एंटी-ड्रोन क्षमताओं को भी मजबूत कर रहा है। नए ढांचे से इन बढ़ती जिम्मेदारियों को संभालने और अहम प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
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