पटना , अक्टूबर 23 -- बिहार विधानसभा के प्रथम चरण के तहत गोपालगंज जिले में 06 नवंबर को होने वाले चुनाव में जनता दल यूनाईटेड (जदयू) के कद्दावर नेता बाहुबली अमरेन्द्र पांडेय जहां सियासी पिच पर छक्का मारने के लिये बेताब हैं, वहीं शिक्षा मंत्री सुनील कुमार दूसरी बार जीत की आस में चुनावी समर में ताल ठोक रहे हैं तथा रामसेवक सिंह पांचवी बार जीत का परचम लहराने के लिये बेताब है।

गोपालगंज जिले में छह विधानसभा क्षेत्र है। वर्ष 2020 के चुनाव में यहां राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का पलड़ा भारी रहा था। राजग ने यहां चार सीटों बरौली, गोपालगंज, कुचायकोट और भोरे (सुरक्षित) पर जीत का परचम लहराया था, वहीं महागठबंधन ने दो सीटें बैकुंठपुर और हथुआ अपने नाम की थी।

कुचायकोट सीट पर राजग के घटक जनता दल यूनाईटेड (जदयू) विधायक अमरेन्द्र पांडेय सियासी पिच पर छक्का मारने के लिये समर में उतरे हैं। वहीं महागठबंधन के घटक कांग्रेस ने यहां हरि नारायण सिंह को उनका विजयी रथ रोकने के लिये समर में उतारा है। बाहुबली विधायक अमरेन्द्र पांडेय ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के टिकट पर 2005 फरवरी और 2005 अक्टूबर में कटैया विधानसभा से जीत हासिल की थी। परिसीमन के बाद कटैया सीट की जगह कुचायकोट सीट बनी। कुचायकोट सीट से श्री पांडेय ने लगातार तीन बार 2010, 2015 और 2020 में जदयू के टिकट पर चुनाव जीता था। इस सीट पर सात उम्मीदवार भाग्य आजमां रहे हैं।

हथुआ से जदयू उम्मीदवार और पूर्व मंत्री रामसेवक सिंह पांच का दम दिखाने के लिये चुनावी अखाड़े में जोर आजमां रहे हैं, वहीं राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायक राजेश कुमार सिंह यहां दूसरी बार जीत की आस में हैं। वर्ष 2020 के चुनाव में हथुआ सीट से तत्कालीन बिहार सरकार के समाज कल्याण मंत्री और जदयू के तत्कालीन विधायक रहे रामसेवक सिंह को राजद के राजेश कुमार सिंह ने मात दी थी। इस बार भी जदयू और राजद के दोनों प्रत्याशी आमने-सामने हैं। रामसेवक सिंह ने इससे पूर्व मीरगंज विधानसभा सीट से 2005 फरवरी और 2005 अक्टूबर में जीत हासिल की थी। परिसीमन के बाद मीरगंज की जगह हथुआ सीट बनी। हथुआ सीट पर रामसेवक सिंह ने 2010 और 2015 में जीत हासिल की थी। इस सीट पर दस उम्मीदवार मैदान में उतरे हैं।

भोरे(सु) सीट से शिक्षा मंत्री और जदयू प्रत्याशी सुनील कुमार यहां दूसरी बार जीत की तलाश में हैं। वहीं महागठबंधन के घटक भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी लेनिनवादी (भाकपा माले) ने यहां धनंजय को उम्मीदवार बनाया है, जबकि जनसुराज की उम्मीदवार प्रीति किन्नर यहां मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने में लगी है। भोरे (सुरक्षित) सीट पर पूर्व मंत्री चंद्रिका राम और उनके परिवार का दबदबा रहा है। वर्ष 1957 में इस सीट पर चंद्रिका राम ने जीत दर्ज की थी।

चंद्रिका राम के पुत्र अनिल कुमार ने यहां 2005 फरवरी, 2005 अक्टूबर और 2015 में जीत हासिल की। वर्ष 2020 में महागठबंधन में सीटों के तालमेल के तहतयह सीट भाकपा माले को मिली है। दूसरी तरफ कांग्रेस के तत्कालीन विधायक अनिल कुमार बेटिकट हो गये। इस सीट पर पूर्व मंत्री स्वर्गीय चंद्रिका राम के पुत्र और तत्कालीन विधायक अनिल कुमार के भाई और पूर्व भारतीय पुलिस सेवा (आइपीएस) के अधिकारी सुनील कुमार ने जदयू के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। बाद में सुनील कुमार नीतीश कुमार की सरकार में शिक्षा मंत्री बनाये गये। इस सीट पर पांच उम्मीदवार चुनावी मैदान में डटे हैं।

बैकुंठपुर सीट से राजद प्रत्याशी और पूर्व विधायक स्व. देवदत्त प्रसाद के पुत्र प्रेम शंकर प्रसाद यहां दूसरी बार जीत दर्ज करने के प्रयास में हैं, वहीं भाजपा ने यहां मिथलेश तिवारी को समर में उतारा है। वर्ष 2020 के चुनाव में राजद के प्रेम शंकर प्रसाद ने भाजपा के विधायक मिथिलेश तिवारी को चुनावी अखाड़े में मात दी थी। इस चुनाव में जदयू से बगावत कर पूर्व मंत्री स्व. ब्रज किशोर नारायण सिंह के पुत्र और पूर्व विधायक मंजीत कुमार सिंह ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर अपनी तकदीर आजमायी लेकिन उन्हें तीसरे नंबर पर संतोष करना पड़ा। मंजीत सिंह राजग के बागी उम्मीदवार थे और खुद तो डूबे अपने गठबंधन के उम्मीदवार मिथिलेश तिवारी को भी ले डूबे। इस सीट पर एक बार फिर राजद के प्रेम शंकर प्रसाद और भाजपा के मिथिलेश तिवारी के बीच भिड़ंत देखने को मिलेगी। अन्य उम्मीदवारों में भाजपा के पूर्व कार्यकर्ता पूर्व डीआईजी रामनारायण सिंह राष्ट्रवादी जनलोक पार्टी (सत्य)से , बहुजन समाज पार्टी से पूर्व ब्लॉक प्रमुख के पति प्रदीप यादव के साथ जनसुराज ने भी अपना उम्मीदवार मैदान में उतार रखा है। इस सीट पर सात प्रत्याशी भाग्य आजमां रहे हैं।

बरौली सीट से वर्ष 2020 के चुनाव में जीते भाजपा के विधायक रामप्रवेश राय इस बार के चुनाव में बेटिकट कर दिये गये हैं। राजग में सीट शेयरिग के तहत यह सीट जदयू को मिली है। जदयू ने यहां मंजीत सिंह को उम्मीदवार बनाया है। वर्ष 2020 के चुनाव में भाजपा के रामप्रवेश राय ने राजद के रियाजुल हक राजू को मात दी थी। राजद ने यहां दिलीप सिंह को उम्मीदवार बनाया है, वहीं राजद से बागी रियाजुल हक बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के टिकट पर मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने में लगे हैं। इस सीट पर नौ उम्मीदवार मैदान में उतरे हैं।

वर्ष 2020 के चुनाव में गोपालगंज सीट पर भाजपा के सुभाष सिंह ने लगातार चौथी बार जीत का परचम लहराया था। श्री सिंह जीत के बाद नीतीश कुमार की सरकार में मंत्री भी बनाये गये थे। वर्ष 2022 में उनके निधन के बाद रिक्त हुयी इस सीट पर उनकी पत्नी कुसुम देवी निर्वाचित हुयी। इस बार के चुनाव में भाजपा ने कुसुम देवी को बेटिकट कर दिया है और जिला परिषद के चेयरमैन सुभाष सिंह को उम्मीदवार बनाया है। इस सीट पर कांग्रेस ने ओम प्रकाश गर्ग पर दांव लगाया है, जबकि बसपा ने यहां राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के साला पूर्व सांसद अनिरूद्ध प्रसाद यादव उर्फ साधु यादव की पत्नी इंदिरा देवी को मैदान में उतारा है। साधु यादव ने भी इस सीट पर 2000 के चुनाव में जीत दर्ज की है। इस सीट पर आठ उम्मीदवार चुनाव में डटे हैं।

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