मोहाली , अप्रैल 08 -- पंजाब के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने बुधवार को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के उस फैसले का स्वागत किया, जिसमें पंजाब सरकार को कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लंबित महंगाई भत्ते (डीए) के बकाये को जून तक भुगतान करने का निर्देश दिया गया है।

इसके साथ ही उन्होंने कर्मचारियों के अधिकारों की निरंतर अनदेखी के लिए 'आप' के नेतृत्व वाली राज्य सरकार की कड़ी आलोचना की।

श्री सिद्धू ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कर्मचारियों को, जो राज्य की प्रशासनिक मशीनरी की रीढ़ हैं, अपना हक पाने के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटाना पड़ा। उच्च न्यायालय के सख्त निर्देशों ने एक बार फिर बढ़ती महंगाई और बार-बार की मांगों के बावजूद डीए के समय पर वितरण को सुनिश्चित करने में पंजाब सरकार की विफलता को उजागर कर दिया है। उन्होने कहा, "यह निर्णय पंजाब सरकार की विफलता का एक कड़ा प्रमाण है। कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को उनका वाजिब हक देने के बजाय, सरकार भुगतान में देरी करती रही और उन्हें अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर किया।"उन्होंने कहा कि यह और भी चौंकाने वाला है कि जहाँ पंजाब सरकार आत्म-प्रचार और भ्रामक जनसंपर्क अभियानों पर जनता का पैसा बर्बाद कर रही है, वहीं दूसरी ओर वह कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वैध बकाया को जारी करने के लिए अदालत से और समय मांग रही थी।

उन्होंने यह भी कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों और निचले स्तर के कर्मचारियों के बीच डीए दरों में असमानता अनुचित और भेदभावपूर्ण है। उन्होंने कहा कि ऐसी नीतियां सामान्य सरकारी कर्मचारियों के वित्तीय संघर्षों के प्रति संवेदनशीलता की कमी को दर्शाती हैं। उन्होंने मांग की कि पंजाब सरकार तत्काल उच्च न्यायालय के निर्देशों का अक्षरशः पालन करे और बिना किसी देरी के सभी लंबित बकाया जारी करे तथा यह सुनिश्चित करे कि भविष्य में ऐसी स्थिति पैदा न हो।

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