मैसुरु , अक्टूबर 23 -- कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने मैसुरु के सुत्तूर मठ में दिये गये बयान में अपने खिलाफ स्टिंग ऑपरेशन के पीछे ब्लैकमेल करने की साजिश का आरोप लगाते हुए मंगलुरु की रहने वालीं कृपा अल्वा और पत्रकार राकेश शेट्टी का नाम लिया है।

श्री सिद्दारमैया ने सच्चाई सामने लाने के लिए पारदर्शी जांच की मांग करते हुए कहा कि यह मामला सितंबर में उनके संज्ञान में आया था। उन्होंने खुद पुलिस से संपर्क किया ताकि सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने आरोप लगाया कि इस ऑपरेशन का मकसद झूठे आरोप लगाकर उनकी छवि खराब करना था। उन्होंने बताया कि ऐसे आरोपों को रोकने के लिए उन्होंने अदालत से रोक भी ले ली है। उन्होंने कहा कि यह पता लगाना जरूरी है कि इस साजिश के पीछे कौन है और इसमें शामिल लोग कांग्रेस से हैं या विपक्ष से।

उन्होंने सरकार की जांच एजेंसियों पर भरोसा जताते हुए कहा कि उन्हें विशेष जांच दल (एसआईटी) या किसी अन्य उच्च-स्तरीय जांच की जरूरत नहीं लगती। उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में अपने आठ साल के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौरान उन पर ऐसे कोई आरोप नहीं लगे थे। उन्होंने कहा कि उनके पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें किसी के नैतिक समर्थन की जरूरत नहीं है क्योंकि तथ्य खुद अपनी कहानी बयां कर देंगे।

यह विवाद तब और गहरा गया जब मंत्री डॉ. यतींद्र सिद्दारमैया ने आरोप लगाया कि उनके पिता को ब्लैकमेल करने और उनकी राजनीतिक साख को नुकसान पहुंचाने के लिए कांग्रेस के भीतर के ही कुछ लोग इस साजिश में शामिल हैं।

श्री यतींद्र ने सामने आए वीडियो का हवाला देते हुए दावा किया कि इससे पार्टी नेताओं और एक मीडिया प्रतिनिधि की संलिप्तता का संकेत मिलता है। उन्होंने कहा कि जांच से यह पता चलना चाहिए कि इसमें शामिल लोगों ने खुद ऐसा किया या वे किसी प्रभावशाली व्यक्ति के इशारे पर काम कर रहे थे। उन्होंने पार्टी की एक महिला नेता का भी जिक्र किया, जो पुत्तुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस का टिकट पाने की इच्छा जता रही थी। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए।

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