मैसूरु , जून 28 -- कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर सत्ता में बने रहने के लिए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का सहारा लेकर पात्र मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप लगाते हुए कहा है कि चुनाव आयोग अब संवैधानिक रूप से स्वतंत्र तरीके से काम नहीं कर रहा है।

श्री सिद्दारमैया ने यहां कांग्रेस पार्टी के 'एसआईआर जागरूकता सम्मेलन' में दावा किया कि इस अभियान का उद्देश्य उन वर्गों को मताधिकार से वंचित करना है जो पारंपरिक रूप से कांग्रेस का समर्थन करते हैं, जिनमें गरीब, किसान, मजदूर और अल्पसंख्यक शामिल हैं।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया, "चुनाव आयोग का गठन लोकतंत्र की रक्षा और निष्पक्ष रूप से चुनाव कराने के लिए किया गया था। पहले यह संवैधानिक रूप से काम करता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। कांटे की टक्कर वाले निर्वाचन क्षेत्रों में अगर कुछ हजार असली मतदाताओं के नाम भी हटा दिए जाएं, तो इससे चुनाव के नतीजे पूरी तरह बदल सकते हैं। कई विधायकों ने महज 1,000 से 5,000 मतों के अंतर से जीत हासिल की है। अगर मतदाता सूची से चार या पांच हजार असली मतदाताओं को हटा दिया जाए, तो उनकी जीत असंभव हो जाएगी। इसीलिए हमने राज्यव्यापी जागरूकता अभियान शुरू किया है।"भाजपा पर चुनावी प्रक्रिया में हेरफेर करने की कोशिश का आरोप लगाते हुए श्री सिद्दारमैया ने कहा कि पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर केवल 36 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि 64 प्रतिशत मतदाताओं ने अन्य दलों का समर्थन किया था। उन्होंने कहा, "अगर एसआईआर के जरिए उन मतदाताओं के एक छोटे से हिस्से को भी हटा दिया जाता है, तो चुनाव के नतीजे बदले जा सकते हैं। कांग्रेस कार्यकर्ताओं को 30 जून से 29 जुलाई तक सतर्क रहना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि एक भी पात्र मतदाता सूची से बाहर न छूटे।"कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि लोकसभा में भाजपा की सीटें 2019 के 303 से घटकर 2024 में 240 होने के कारण अब एसआईआर के माध्यम से भविष्य के चुनावों को प्रभावित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, "वे अब एसआईआर के माध्यम से जनता के फैसले को बदलना चाहते हैं।"भाजपा पर हमला तेज करते हुए श्री सिद्दारमैया ने उसे 'संविधान विरोधी और लोकतंत्र विरोधी' बताया और आरोप लगाया कि वह केवल तानाशाही शासन में विश्वास करती है। उन्होंने आरोप लगाया, "वे सत्ता में बने रहने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।"पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि मतदाता सूची में इस तरह के संशोधनों का असर महाराष्ट्र, हरियाणा और पश्चिम बंगाल में पहले ही देखा जा चुका है, जबकि केरल में ऐसे प्रयास विफल रहे।

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