अमृतसर , सितंबर 04 -- श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने संगरूर जिले के शेरों गांव के सिख युवक मोहनजीत सिंह के साथ कथित पुलिस प्रताड़ना और उसके ककारों की बेअदबी के मामले में आरोपित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
रूपनगर के गुरुद्वारा श्री भट्ठा साहिब में मिरी-पीरी खालसा मार्च के दौरान शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में जत्थेदार ने कहा कि युवक द्वारा नशे के खिलाफ आवाज उठाने और मुख्यमंत्री के गांव दौरे के दौरान विरोध करने के बाद उसके साथ कथित तौर पर गंभीर दुर्व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि युवक ने पड़ोसी के घर की छत से मुख्यमंत्री के विरोध में काला झंडा दिखाया था, जिसे उन्होंने उसका लोकतांत्रिक अधिकार बताया। उनके अनुसार, आरोप है कि स्थानीय पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) हरविंदर सिंह खैरा ने झंडा युवक के गले में डालकर उसे वहां से खींचकर ले गए और बाद में उसके साथ कथित तौर पर अमानवीय व्यवहार किया।
ज्ञानी गड़गज्ज ने कहा कि युवक के बयान के अनुसार पुलिसकर्मियों ने उसकी कमर पर तार वाले ब्रश से वार किया, घावों पर नमक डाला, सिर पर जूतों से प्रहार किया तथा उसकी दाढ़ी और केशों का अपमान किया। उन्होंने आरोप लगाया कि युवक का कच्छेरा भी उतारकर फाड़ दिया गया।
जत्थेदार ने बताया कि उन्होंने संगरूर के पुलिस अधीक्षक से बात कर संबंधित डीएसपी और थाना प्रभारी को तत्काल बर्खास्त करने तथा उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई और धार्मिक भावनाएं आहत करने तथा कथित यातना के मामले में केस दर्ज नहीं किया गया तो श्री अकाल तख्त साहिब पीड़ित युवक के साथ खड़ा होगा और आगे की कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा कि पंजाब में सिख युवाओं के साथ इस तरह का व्यवहार गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने सवाल किया कि क्या पंजाब पुलिस को कानून से ऊपर समझ लिया गया है और क्या उसे मनमाने ढंग से कार्रवाई करने की खुली छूट दी गई है।
जत्थेदार ने पंजाब में नशे की समस्या पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मिरी-पीरी खालसा मार्च के दौरान गांव-गांव में नशे के गंभीर प्रभाव सामने आ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रत्येक गांव में 10 से 15 युवा नशे की चपेट में हैं और पंजाब में चिट्टे की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगनी चाहिए। उन्होंने नशे की लत से पीड़ित युवाओं को समाज से अलग करने के बजाय उनकी मदद और पुनर्वास पर जोर दिया। उन्होंने युवाओं से श्री आनंदपुर साहिब पहुंचने, केशों की संभाल करने, नशे से दूर रहने और गुरु की शिक्षाओं एवं सिख जीवन-पद्धति से जुड़ने की अपील की।
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