लोंगोवाल/ अमृतसर , अगस्त 27 -- श्री अकाल तख्त साहिब से शुरू हुआ मीरी-पीरी खालसामार्च गुरुवार को अपने दूसरे चरण में गुरुद्वारा चुले बाबा आला सिंह, लोंगोवाल से अगले पड़ाव गुरुद्वारा साहिब पातशाही नौवीं, गांव गागा के लिए रवाना हुआ।
इस अवसर पर श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी, तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी टेक सिंह और श्री दरबार साहिब के ग्रंथी ज्ञानी राजदीप सिंह सहित प्रमुख धार्मिक हस्तियां मौजूद रहीं।
मार्च की रवानगी से पहले गुरुद्वारा चुले बाबा आला सिंह जी में बंदी सिंहों की रिहाई और चढ़दी कला के लिए श्री अखंड पाठ साहिब आरंभ करवाया गया। इसकी अरदास ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने की। ज्ञानी राजदीप सिंह ने कथा-विचार के दौरान संगत को सिख इतिहास से अवगत करवाते हुए गुरमत के अनुसार जीवन जीने की प्रेरणा दी। इसके बाद श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पावन स्वरूप पालकी में सुशोभित कर खालसा मार्च को रवाना किया गया।
इस मौके पर ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कहा कि गुरु साहिब ने सिख समुदाय को एक परिवार बनाया है और पंथ की मंजिल भी साझा है। उन्होंने बाबा आला सिंह के जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका इतिहास सिखों को पंथक हितों के लिए दृढ़ता से खड़े होने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि सिख इतिहास में जब भी पंथ के बड़े हित सामने आये, अलग-अलग मिसलें अपने मतभेद भुलाकर एक निशान के नीचे एकत्र हुईं। इसी एकता ने नादिर शाह और अहमद शाह अब्दाली जैसी शक्तियों का मुकाबला किया। महाराजा रणजीत सिंह ने भी विभिन्न सिख ताकतों को एकजुट करके मजबूत सिख राज्य स्थापित किया। उन्होंने कहा कि आज भी सिख समुदाय को निजी मतभेद भुलाकर पंथक हितों के लिए एकजुट होने की जरूरत है।
ज्ञानी गड़गज्ज ने सिख समाज में बढ़ रहे तलाक के मामलों पर चिंता जताते हुए युवाओं को अपने बुजुर्गों के इतिहास से प्रेरणा लेने की अपील की। उन्होंने बाबा आला सिंह और बीबी फतेह कौर के जीवन का उल्लेख करते हुए पति-पत्नी के रिश्ते में आपसी सहयोग और जिम्मेदारी के महत्व पर जोर दिया।
एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि पंथ विरोधी ताकतें सिख सिद्धांतों को कमजोर करने के प्रयास कर रही हैं। उन्होंने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब सिख पंथ की सर्वोच्च संस्था है और इसके सिद्धांतों की मजबूती तथा धर्म के प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी सभी की साझा है। एडवोकेट धामी ने पंजाब के युवाओं में बढ़ती नशे की समस्या पर चिंता जताते हुए कहा कि गुरु साहिबान के नाम पर बसे पंजाब के युवाओं का नशे की गिरफ्त में जाना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि मीरी-पीरी खालसा मार्च का उद्देश्य सिख सिद्धांतों का प्रचार करने के साथ युवाओं को नशे से दूर रहकर गुरमत के अनुसार जीवन जीने के लिए प्रेरित करना भी है। उन्होंने बताया कि मार्च के विभिन्न पड़ावों पर युवाओं को नशे से दूर रहने और सिख स्वरूप में रहने के लिए प्रेरित किया जा रहा है तथा कई युवा इसके लिए संकल्प भी ले रहे हैं।
बंदी सिंहों की रिहाई और चढ़दी कला के लिए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से आज पंजाब के ऐतिहासिक गुरुद्वारों में श्री अखंड पाठ साहिब आरंभ करवाये गये। इसी क्रम में सचखंड श्री हरमंदिर साहिब परिसर स्थित गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब दीवान हॉल में भी अखंड पाठ साहिब की शुरुआत हुई।
एसजीपीसी सदस्य भाई अजीब सिंह अभ्यासी और सचिव बलविंदर सिंह काहलवां ने कहा कि कई बंदी सिंह अपनी सजाएं पूरी करने के बावजूद लंबे समय से जेलों में बंद हैं। उन्होंने कहा कि उनकी रिहाई का मामला मानवाधिकार और न्याय से जुड़ा हुआ है तथा सरकारों को इसे राजनीतिक दृष्टिकोण के बजाय मानवीय एवं सामुदायिक भावनाओं के अनुरूप देखते हुए गंभीर प्रयास करने चाहिए।
श्री काहलवां ने बताया कि एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी के निर्देश पर सभी ऐतिहासिक गुरुद्वारों में अखंड पाठ साहिब आरंभ करवाये गये हैं, जिनके भोग 29 अगस्त को सुबह नौ बजे डाले जाएंगे। इसके अलावा सभी शैक्षणिक संस्थानों में भी 29 अगस्त को श्री सुखमनी साहिब का पाठ करवाकर बंदी सिंहों की चढ़दी कला के लिए अरदास की जाएगी।
एसजीपीसी ने संगत से बंदी सिंहों की रिहाई और समूचे खालसा पंथ की चढ़दी कला के लिए अरदास में शामिल होने की अपील की है।
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