उज्जैन , अगस्त 06 -- मध्यप्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में वर्ष 2028 में प्रस्तावित सिंहस्थ महापर्व के लिए पुलिस प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा एवं यातायात प्रबंधन की तैयारियां शुरू कर दी हैं। उज्जैन जोन के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) राकेश गुप्ता की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में देश-विदेश से आने वाले अनुमानित 30 करोड़ श्रद्धालुओं की सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था को लेकर विस्तृत कार्ययोजना पर मंथन किया गया।
बैठक में एडीजी राकेश गुप्ता, पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) नवनीत भसीन, पुलिस अधीक्षक तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित सुरक्षा प्रणाली, भीड़ नियंत्रण और यातायात प्रबंधन की तैयारियों की समीक्षा की। अधिकारियों ने सिंहस्थ-2028 के दौरान एआई-सक्षम सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन, फेशियल रिकग्निशन तकनीक और इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के माध्यम से पूरे मेला क्षेत्र की निगरानी सुनिश्चित करने की योजना पर विस्तार से चर्चा की।
समीक्षा बैठक में पुलिस की प्रस्तावित मेगा सुरक्षा योजना के तहत मेला क्षेत्र को 10 जोन, 40 सेक्टर और 80 थाना क्षेत्रों में विभाजित करने के प्रस्ताव पर विचार किया गया। इसके अलावा लगभग 62 हजार 950 पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों तथा 500 राजपत्रित अधिकारियों की तैनाती की योजना की भी समीक्षा की गई।
पुलिस अधीक्षक ने प्रस्तुतीकरण में बताया कि सिंहस्थ महाकुंभ-2028 का आयोजन 09 अप्रैल से 08 मई 2028 तक प्रस्तावित है। वर्ष 2016 के सिंहस्थ में जहां लगभग नौ से 10 करोड़ श्रद्धालु पहुंचे थे, वहीं इस बार करीब 30 करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन का अनुमान है। विशेष रूप से तृतीय अमृत स्नान के अवसर पर एक ही दिन में लगभग पांच करोड़ श्रद्धालुओं के स्नान की संभावना को देखते हुए विशेष सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन योजना तैयार की जा रही है।
बैठक में बताया गया कि लगभग तीन हजार हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित होने वाले मेला परिसर की निगरानी के लिए करीब तीन हजार 500 एआई-सक्षम सीसीटीवी कैमरे, 416 ड्रोन, अंडरवाटर कैमरे तथा दो हजार 700 से अधिक पब्लिक एड्रेस सिस्टम स्थापित करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) और फेशियल रिकग्निशन तकनीक के माध्यम से चोरी के वाहनों और संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान सुनिश्चित करने की योजना बनाई गई है।
यातायात एवं पार्किंग व्यवस्था की समीक्षा के दौरान उज्जैन आने वाले आठ प्रमुख मार्ग-इंदौर, देवास, मक्सी, आगर, गरोठ, नागदा, उन्हेल और बड़नगर-को प्रदेश के सात रणनीतिक गेटवे जिलों के माध्यम से समन्वित करने की योजना पर भी चर्चा की गई। अधिकारियों ने बाहरी क्षेत्र (लेयर-3) में लगभग तीन हजार 200 हेक्टेयर क्षेत्र में 100 से अधिक पार्किंग स्थलों के विकास तथा प्रतिदिन लगभग 2.20 लाख वाहनों और 52.60 लाख श्रद्धालुओं की क्षमता के अनुरूप यातायात प्रबंधन व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए।
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