नयी दिल्ली , अक्टूबर 30 -- केंद्रीय उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुरुवार को मणिपुर में के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला, उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और मणिपुर सरकार की उपस्थिति में राज्य के विकास रोडमैप पर तीसरी समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
बैठक में जारी परियोजनाओं की प्रगति का आकलन, समावेशी विकास के नए अवसरों की पहचान और राज्य की विकास प्राथमिकताओं को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा व्यक्त आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप बनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
श्री सिंधिया ने बैठक में मणिपुर पोलो को विरासत और अवसर, दोनों के प्रतीक के रूप में पुनर्जीवित करने पर जोर दिया। विश्व स्तरीय प्रशिक्षण सुविधाओं और संस्थानों की स्थापना के ज़रिए इस खेल को एक नए पारंपरिक और वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए योजनाओं की रूपरेखा प्रस्तुत की, जिससे मणिपुर एक बार फिर भारत की पोलो राजधानी बन सके। इस पहल का मकसद खेल-संबंधी पर्यटन को बढ़ावा देना, स्थानीय युवाओं को सशक्त बनाना और वैश्विक मंच पर मणिपुर की सांस्कृतिक पहचान को मज़बूत करना है।
श्री सिंधिया ने हथकरघा और हस्तशिल्प में राज्य की पारंपरिक शक्तियों को बढ़ावा देने के लिए की गई पहलों की समीक्षा की और स्थानीय कारीगरों तथा बुनकर समुदायों को सशक्त बनाने के लिए 250 लघु और 200 मेगा उत्पादन इकाइयों के निर्माण और स्वयं सहायता समूहों को सहायता प्रदान करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि मणिपुर की अनूठी शिल्प परंपराओं को संरक्षित रखने के साथ ही रोज़गार के नए अवसर भी पैदा करेंगे, जिससे राज्य की रचनात्मक उद्यमशीलता और उद्यमिता के केंद्र के रूप में स्थिति और मज़बूत होगी।
इस चर्चा में नवाचार और कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए एक प्रौद्योगिकी एवं डिज़ाइन संस्थान के साथ एक एकीकृत टेक्सटाइल पार्क की स्थापना के ज़रिए, बुनियादी ढाँचे और औद्योगिक विस्तार पर भी ध्यान केंद्रित किया गया।
कृषि क्षेत्र में, मंत्री ने ताड़ के तेल की खेती की प्रगति की समीक्षा की और कृषि-आधारित आजीविका को मज़बूत करने और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए अगले चार सालों में 10,000 हेक्टेयर का लक्ष्य रखा।
श्री सिंधिया ने जारी परियोजनाओं की स्थिति की समीक्षा की और सभी क्षेत्रों में त्वरित कार्यान्वयन और परिणाम-आधारित प्रगति की ज़रुरत पर बल दिया।
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