नयी दिल्ली , नवंबर 03 -- संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने साहित्य, संगीत, फिल्म, छात्रवृत्ति और सांस्कृतिक संरक्षण में अमूल्य योगदान के लिए पूर्वोत्तर क्षेत्र की छह शख्सियतों को आज भारत रत्न डॉ भूपेन हजारिका राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किये।
श्री सिंधिया ने असम के गुवाहाटी में आयोजित एक कार्यक्रम में ये सम्मान प्रदान करते हुए डॉ भूपेन हजारिका को एक कवि, संगीतकार और देश की आवाज़ के रूप में श्रद्धांजलि अर्पित करते हुये कहा कि उनका काम तथा उनकी कला देश को एकता सूत्र में बांधती है। भूपेन दा के नाम पर पुरस्कार प्रदान करना न केवल एक कलाकार बल्कि सहानुभूति और एक सांस्कृतिक युग का सम्मान है।
भूपेन दा सम्मान साहित्य, संगीत, फिल्म, छात्रवृत्ति और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए जिन हस्तियों को दिया गया है उनमें येशे दोरजी थोंगची (अरुणाचल प्रदेश), लेशराम मेमा (मणिपुर), रजनी बसुमतारी (असम), एल.आर. सेलो (मिजोरम), डॉ. सुरज्या कांता हजारिका (असम), और प्रोफेसर डेविड आर सिमलीह (मेघालय) शामिल हैं। इस दौरान नन्ही छांव 12वीं राष्ट्रीय निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को भी पुरस्कार दिया गया।
श्री सिंधिया ने कहा कि 1950 में असम और अरुणाचल प्रदेश को हिला देने वाले विनाशकारी भूकंप के बाद उनके दादा महाराजा जीवाजीराव सिंधिया ने लोगों को समय पर सहायता और एकजुटता प्रदान करते हुए असम राहत कोष की स्थापना की थी। उन्होंने कहा कि कैसे उसी जलप्रलय , जिसने भूपेन दा की जन्मस्थली सदिया को मिटा दिया, उनके अमर गीतों को भी जन्म दिया, जिन्होंने दर्द को कविता में और हानि को प्रकाश में बदल दिया।
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