नयी दिल्ली , अगस्त 30 -- हिंदी के वयोवृद्ध साहित्यकार बल्लभ डोभाल का यहां निगमबोध घाट पर रविवार को अंतिम संस्कार कर दिया गया।
साहित्यकार बल्लभ डोभाल का शनिवार को 97 वर्ष की आयु में उत्तरप्रदेश के नोएडा में निधन हो गया था। वह कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। श्री डोभाल के पुत्र प्रकाश डोभाल और कैलाश डोभाल ने उनकी चिता को मुखाग्नि दी।
हिंदी लेखनी के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर श्री डोभाल के अंतिम संस्कार में साहित्य, संस्कृति, कला और पत्रकारिता से जुड़े लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इन लोगों में साहित्यकार पंकज बिष्ट, महेश दर्पण, राजा खुगशाल, भगवती प्रसाद डोभाल, डॉ. रोशन गौड़, कैलाश धूलिया, रमेश ध्यानी और राजेश डंडरियाल सहित कई प्रमुख लोग शामिल थे। साहित्यकार प्रोफेसर प्रदीप कुमार वेदवाल ने श्री डोभाल के निधन को हिंदी साहित्य के लिए अपूरणीय क्षति बताया और कहा कि उन्होंने अपनी लेखनी से समाज, संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं को अभिव्यक्ति दी।
श्री डोभाल जी की पुत्री प्रभा थपलियाल ने बताया कि उनके पिता के निधन पर परिवार को देश-विदेश से पाठकों, मित्रों और शुभचिंतकों के शोक संदेश तथा संवेदनाएं लगातार मिल रही हैं। अपने पिता के साहित्यिक जीवन से जुड़े प्रसंगों को साझा करते हुए 'तिब्बत की बेटी' सहित उनके उपन्यासों के लेखन और प्रकाशन के दौर की स्मृतियों का उन्होंने उल्लेख किया।
बल्लभ डोभाल को राहुल सांकृत्यायन की परंपरा का लेखक माना जाता था। उन्होंने हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं में 44 से अधिक पुस्तकों की रचना की। उनकी रचनाओं में मानव अंतर्मन, सामाजिक विसंगतियों और मानवीय संवेदनाओं की गहरी पड़ताल दिखाई देती है। वृद्ध जीवन की समस्याओं और सेवानिवृत्ति के बाद के अकेलेपन जैसे विषयों को उन्होंने विशेष संवेदनशीलता के साथ उठाया। उनकी प्रमुख कृतियों में कोलाज, तिब्बत की बेटी, आधी रात का सफर, उत्तराखंड के कथा-शिल्पी, दस प्रतिनिधि कहानियां, नुक्कड़ नाटक और चिंतन की नई दिशाएं शामिल हैं। बच्चों के लिए उन्होंने वशिष्ठ और विश्वामित्र, चमत्कारी चिकित्सक तथा श्राद्ध की दक्षिणा जैसी रचनाएं भी लिखीं।
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