अगरतला , अगस्त 28 -- त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा ने शुक्रवार को विधानसभा में नशीले पदार्थों की समस्या के खिलाफ राज्य सरकार के सख्त रुख को दोहराया और मादक पदार्थों से जुड़ी गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल किसी भी पुलिसकर्मी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का संकल्प लिया।
उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियों में शामिल पाए जाने वाले अधिकारियों को नतीजे भुगतने होंगे। इस साल जुलाई तक, एनडीपीएस अधिनियम के तहत अपराधों में सज़ा दिलाने की दर 14.7 प्रतिशत है।
कांग्रेस विधायक गोपाल चंद्र रॉय ने बढ़ते मादक पदार्थ संकट और युवाओं पर इसके बुरे असर को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने नशीले पदार्थ के कारोबार में पुलिस की मिलीभगत के बारे में पूछा और एफआईआर, गिरफ़्तारियों, चार्जशीट और विभागीय कार्रवाई से जुड़े पूरे आंकड़े मांगे।
इसके जवाब में, श्री साहा ने नशीले पदार्थ की आपूर्ति एवं वितरण से निपटने के लिए राज्य पुलिस और बीएसएफ समेत कई एजेंसियों के साथ सरकार के सहयोग पर ज़ोर दिया। सख्ती बरतने के अलावा, वह नशीले पदार्थ के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए जागरूकता अभियान भी चला रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश और दिल्ली जैसे राज्यों के लोगों से जुड़े एनडीपीएस मामलों में गिरफ्तारियों का उल्लेख किया। सरकारी वकीलों और पुलिस अधिकारियों के बीच बातचीत के ज़रिए सज़ा दिलाने की दर को बेहतर बनाने की कोशिशें की जा रही हैं।
श्री साहा ने इन मामलों को सुलझाने के लिए पुलिस के साथ मिलकर काम करने में व्यक्तिगत रुचि ली है, खासकर नाबालिगों के नशे की लत का शिकार होने को लेकर माता-पिता की चिंताओं पर ध्यान दिया है। नशीले पदार्थों के इस्तेमाल और उसकी बिक्री को रोकने के लिए निर्देश जारी किए गए हैं, खासकर नाबालिगों के मामले में।
मुख्यमंत्री ने बताया कि एनडीपीएस अधिनियम के तहत सज़ा दिलाने की दर बढ़कर 14.7 प्रतिशत हो गई है। इसके अलावा, मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ भी कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी पुलिस अधिकारी भ्रष्ट नहीं होते और भरोसा दिलाया कि इसमें शामिल लोगों के ख़िलाफ़ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। श्री साहा ने मादक पदार्थ का इस्तेमाल करने वालों और उनकी तस्करी करने वालों पर सरकार और पुलिस के लगातार दबाव पर ज़ोर दिया और कहा कि कानून तोड़ने वालों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई जारी रहेगी।
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