मुंबई , जून 23 -- महाराष्ट्र विधानसभा में मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक एवं पूर्व मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने विनायक दामोदर सावरकर को 'भारत रत्न' देने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजने में प्रशासनिक नाकामी पर भारी नाराजगी जतायी और नौकरशाही पर बड़ी लापरवाही का आरोप लगाते हुए विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव पेश किया।

सदन में गत पांच मार्च को दिये गये सरकारी आश्वासन को पूरा करने में हुई देरी से नाराज श्री मुनगंटीवार ने विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव पेश किया। सदन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "पांच मार्च 2026 को मैंने वीर सावरकर को भारत रत्न देने के संबंध में एक प्राइवेट मेम्बर्स रेजोल्यूशन पेश किया था। सरकार ने सदन को भरोसा दिया था कि औपचारिक प्रस्ताव पास कर केंद्र को भेजा जायेगा। मैंने खुद दिल्ली में इसकी जानकारी ली, जहां पता चला कि ऐसा कोई भी प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास नहीं पहुंचा है।"भाजपा नेता ने इस बात पर जोर दिया कि इस प्रस्ताव से कोई वित्तीय बोझ नहीं पड़ने वाला है और यह पार्टी के 2019 के चुनावी घोषणापत्र में किये गये वादे को पूरा करने का मामला है। उन्होंने इस सुस्ती के लिए सीधे तौर पर प्रशासनिक तंत्र को जिम्मेदार ठहराया और कहा, "भले ही मंत्रियों की मंशा साफ हो, लेकिन कुछ अधिकारी इतने सुस्त हैं कि वे निर्देशों पर अमल ही नहीं करते। हालांकि मैंने यह प्रस्ताव मंत्रियों के खिलाफ पेश किया है, लेकिन असल में यह काम न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ होना चाहिए।"विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने तय संसदीय प्रक्रियाओं का पालन करने को कहा। श्री नार्वेकर ने कहा, "मैं इस मामले के तथ्यों की जांच करूंगा। यह मामला सदन को दिये गये आश्वासन से जुड़ा है, इसलिए इसे पहले 'आश्वासन समिति' के सामने रखा जाना चाहिए।"जब श्री मुनगंटीवार ने दलील दी कि अधिकारी अक्सर समिति की अनदेखी करते हैं, जिसके चलते अध्यक्ष के सीधे हस्तक्षेप की जरूरत है, तो स्पीकर अपने रुख पर कायम रहे। श्री नार्वेकर ने साफ किया कि सदन का संरक्षक होने के नाते वे अपनी विशेषाधिकार शक्तियों का इस्तेमाल तभी करेंगे, जब संसदीय प्रक्रिया के बाकी सभी रास्ते खत्म हो जायेंगे।

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