पुणे , जुलाई 30 -- स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणियों को लेकर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि मामले की सुनवाई गुरुवार को पुणे की विशेष एमपी-एमएलए अदालत में जारी रही। न्यायाधीश न्यायमूर्ति अमोल श्रीराम शिंदे की अदालत में चल रही सुनवाई के दौरान श्री गांधी के वकील मिलिंद दत्तात्रेय पवार ने सावरकर की लिखी किताब 'विज्ञाननिष्ठ निबंध' के अंशों की ओर अदालत का ध्यान दिलाया। इस किताब को अदालत के समक्ष पेश कर रिकॉर्ड पर लिया गया।

श्री सावरकर के प्रपौत्र और मामले के शिकायतकर्ता सात्यकि सावरकर ने अदालत के सामने स्वीकार किया कि इस पुस्तक की सामग्री विनायक दामोदर सावरकर ने ही लिखी है।

अधिवक्ता पवार ने किताब के कुछ हिस्सों का ज़िक्र करते हुए कहा कि वीर सावरकर ने इस सोच को "मूर्खतापूर्ण" बताया था कि सत्यनारायण पूजा करने से ईश्वरीय आशीर्वाद मिलेगा या किस्मत बदलेगी। उन्होंने अदालत को यह भी बताया गया कि सावरकर ने लिखा था कि सिर्फ़ लाखों बार भगवान राम का नाम जपने से मुश्किलें दूर नहीं होंगी और कई बार सत्यनारायण पूजा करने से भी मनचाहा नतीजा मिलने की गारंटी नहीं होती।

अधिवक्ता पवार ने उन हिस्सों की ओर भी इशारा किया जिनमें वीर सावरकर ने सवाल उठाया था कि अगर संत ज्ञानेश्वर के पास अलौकिक शक्तियां थीं, तो वे अलाउद्दीन खिलजी के हमले का पहले से पता क्यों नहीं लगा पाए। बचाव पक्ष के अनुसार, ये सवाल सावरकर ने खुद अपनी लेखनी में उठाए थे।

बचाव पक्ष ने उन चमत्कारों का ज़िक्र करने वाले हिस्सों का भी हवाला दिया, जैसे भैंस से वेद पढ़वाना या बेजान दीवार को हिलाना। उन्होंने तर्क दिया कि सावरकर ने सवाल किया था कि चमत्कारी शक्तियों का इस्तेमाल जीवित इंसानों को फिर से ज़िंदा करने के लिए क्यों नहीं किया जा सका।

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