नयी दिल्ली , अगस्त 13 -- जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज आकिब नबी और मध्य प्रदेश के ऑलराउंडर सारांश जैन ने कहा कि भारतीय टेस्ट टीम में चुने जाने उम्मीद और सपना आखिरकार साकार हो गया है। दोनों को श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की सीरीज के लिए पहली बार टीम में चुना गया है।

पहला टेस्ट मैच शनिवार को गाले में शुरु होगा। नबी को जसप्रीत बुमराह की जगह टीम में शामिल किया गया, जो चोट के कारण सीरीज से बाहर हो गए थे, जबकि सारांश ने घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करके अपनी जगह बनाई। नबी के लिए, यह बुलावा उनके शानदार घरेलू सीजन का इनाम है। इस तेज गेंदबाज ने पिछले सीजन में जम्मू-कश्मीर की ऐतिहासिक पहली रणजी ट्रॉफी जीत में अहम भूमिका निभाई थी और कुछ समय से राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने का प्रयास कर रहे थे। 29 साल के खिलाड़ी ने कहा कि उन्हें भरोसा था कि उनके प्रदर्शन से उन्हें आखिरकार सबसे ऊंचे स्तर पर खेलने का मौका मिलेगा।

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के साझ किए गए एक वीडियो में नबी ने सारांश से कहा, "हां, मुझे उम्मीदें थीं। लेकिन एक क्रिकेटर की सोच हमेशा अच्छा प्रदर्शन करने की होनी चाहिए और यह मानकर चलना चाहिए कि दूसरे लोग देख रहे हैं। मुझे पता था कि आज नहीं तो कल मुझे बुलावा जरूर आएगा क्योंकि जब आप इतने सालों से अच्छा खेल रहे होते हैं, तो आपको अपनी मेहनत का फल ज़रूर मिलता है। इसलिए मैं हमेशा इसी सोच के साथ गेंदबाज़ी करता था कि मेरा काम विकेट लेना और अच्छा प्रदर्शन करना है, बाकी सब ऊपर वाले पर छोड़ देता था। जब मेरा नाम आया तो मुझे बहुत अच्छा लगा"नबी ने कहा, "मेरा परिवार बहुत खुश है और मुझे नहीं लगता कि इससे बेहतर कुछ हो सकता है।"सारांश का सफर काफी लंबा रहा है। 33 साल के सारांश ने 2014-15 सीजन में अपना प्रथम श्रेणी पदार्पण किया था और वह 2021-22 में रणजी ट्रॉफ़ी जीतने वाली मध्य प्रदेश की टीम का हिस्सा थे, जिसने फाइनल में मुंबई को हराया था। सालों के इंतज़ार के बावजूद, सारांश ने कहा कि उन्होंने भारत के लिए खेलने का अपना सपना कभी नहीं छोड़ा।

ऑलराउंडर सारांश ने कहा, "टेस्ट क्रिकेट में आपको सब्र रखना पड़ता है और अगर आप भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलना चाहते हैं, तो आपको उसमें भी सब्र रखना होगा। मैंने 2014-15 में रणजी ट्रॉफी में पर्दापण किया था। यह एक लंबा सफर रहा है। इसमें बहुत मेहनत और त्याग शामिल था। लेकिन मुझे यकीन था कि एक दिन मैं ज़रूर भारत के लिए खेलूंगा और इस कामयाबी में मेरे परिवार की बड़ी भूमिका है। मेरे पिता, जो खुद रणजी ट्रॉफ़ी खिलाड़ी रहे हैं, उन्होंने भी मुझे यही बात कही थी। बस सब्र रखो, चीज़ें अपने आप तुम्हारे पास आएंगी।"सारांश ने बताया कि वह मंदिर जा रहे थे, तभी उन्होंने देखा कि उन्हें कई कॉल और मैसेज आए हैं जिनमें उनके चुने जाने की जानकारी दी गई थी।

सारांश ने कहा, "जब मुझे फोन आया, तो मैं गाड़ी चलाकर मंदिर जा रहा था। मैंने बीच में ही कॉल और मैसेज देखे। तभी मुझे पता चला कि मेरा चयन हो गया है।"वहीं, नबी एयरपोर्ट पर थे और 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' में शिविर के लिए बेंगलुरु जाने की तैयारी कर रहे थे, तभी उन्हें बताया गया कि उनके प्लान बदल गए हैं।

नबी ने खुशी-खुशी याद करते हुए कहा, "मैं हवाई अड्डे पर था। हमें सीओई में एक शिविर के लिए जाना था और मैं बेंगलुरु की फ़्लाइट लेने वाला था। मुझे एक कॉल आया जिसमें पूछा गया कि मैं कहां हूं। मैंने उन्हें बताया कि मैं बेंगलुरु जा रहा हूं और एयरपोर्ट पर हूँ। उन्होंने मुझे बताया कि मुझे वहां नहीं जाना है। मुझे श्रीलंका आना है और मेरा चयन हो गया है। शुरू में तो मुझे यकीन ही नहीं हुआ। यह बिल्कुल अनएक्सपेक्टेड था क्योंकि टीम पहले ही घोषित हो चुकी थी। मैं कड़ी मेहनत करने के लिए तैयार था। मैं कैंप में जा रहा था।"सारांश के लिए भारतीय टीम के ड्रेसिंग रूम में घुलना-मिलना काफी आसान रहा है क्योंकि वह कई खिलाड़ियों को पहले से जानते थे।

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