नयी दिल्ली , सितंबर 23 -- भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट संस्थान (आईसीएआई) अगले साल से एक नया फ्रेमवर्क लागू करने वाला है जिसके तहत सार्वजनिक बैंकों की शाखाओं का ऑडिट करने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) का भी अनिवार्य रूप से पीयर रिव्यू किया जाएगा।
पीयर रिव्यू के तहत एक सीए के काम की समीक्षा दूसरे सीए द्वारा की जाती है। तीन या उससे अधिक सीए वाले फर्मों के लिए पीयर रिव्यू पहले से अनिवार्य है। पूंजी बाजार नियामक सेबी के प्रावधानों के अनुसार, सार्वजनिक संस्थानों की मुख्य लेखा-बही का ऑडिट करने वाले सीए के लिए भी यह व्यवस्था पहले से ही लागू है, इसके तहत सार्वजनिक बैंक भी आते हैं। अब इसका विस्तार सार्वजनिक बैंकों की शाखाओं का ऑडिट करने वाले सीए तक किया जा रहा है।
संस्थान के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि यह व्यवस्था 01 जनवरी 2027 से लागू होगी। इसके लिए नया फ्रेमवर्क इसी सप्ताह वेबसाइट पर जारी किया जाएगा। एक बार पीयर रिव्यू होने पर उसकी वैधता तीन साल की होगी। तीन साल बाद फिर से पीयर रिव्यू होगा। फिलहाल हर साल 3,700 सीए फर्मों को इस प्रक्रिया से गुजरना होता है क्योंकि उनके यहां तीन या उससे अधिक सीए पार्टनर हैं।
आईसीएआई के अध्यक्ष प्रसन्ना कुमार डी. ने पिछले सप्ताह एक कार्यक्रम में सार्वजनिक बैंकों की शाखाओं का पीयर रिव्यू करने की जरूरत को स्पष्ट करते हुए कहा था कि बैंकों में आम जनता का पैसा होता है, इसलिए बैंक शाखाओं का ऑडिट करने वाले सीए को भी पीयर रिव्यू के दायरे में लाना जरूरी था। उनका कहना था कि नया पोर्टल आने के बाद हर साल 30-40 हजार पीयर रिव्यू करना संभव हो सकेगा। पहले एक साल में तीन-चार हजार ही पीयर रिव्यू हो पाते थे।
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