नयी दिल्ली , जुलाई 25 -- उत्तर प्रदेश में स्थित प्राचीन बौद्ध स्थल सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है और यह निर्णय दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित यूनेस्को विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र में लिया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पर खुशी जताते हुए इसे प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व का क्षण बताया और कहा कि यह भारत की समृद्ध सभ्यतागत तथा आध्यात्मिक विरासत का वैश्विक सम्मान है। केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस उपलब्धि पर देशवासियों को बधाई दी है।
श्री मोदी ने शनिवार को सोशल मीडिया एक्स पर लिखा "सारनाथ का भगवान बुद्ध से गहरा संबंध है, जिनका ज्ञान, करुणा और सद्भाव का कालजयी संदेश आज भी पूरी दुनिया को प्रेरित करता है। यह सम्मान भारत की समृद्ध सभ्यतागत और आध्यात्मिक विरासत का वैश्विक सम्मान है। मुझे विश्वास है कि इस मान्यता से दुनिया भर के अधिक लोग सारनाथ आयेंगे और भगवान बुद्ध के आदर्शों तथा उनके संदेश से जुड़ने के लिए प्रेरित होंगे।"संस्कृति मंत्रालय के अनुसार विश्व धरोहर के रूप में शामिल इस श्रृंखलाबद्ध संपत्ति में चौखंडी स्तूप तथा सारनाथ के पुरातात्विक अवशेष शामिल हैं, जिनमें धमेख स्तूप, धर्मराजिका स्तूप, मूलगंधकुटी विहार, अशोक स्तंभ तथा अन्य प्राचीन स्मारक शामिल हैं। बौद्ध परंपरा में ऋषिपत्तन, इसिपत्तन और मृगदाव के नाम से प्रसिद्ध सारनाथ वह स्थान है, जहां छठी शताब्दी ईसा पूर्व में भगवान बुद्ध ने अपना पहला उपदेश 'धर्मचक्र प्रवर्तन' दिया था। यह घटना बौद्ध संघ की स्थापना और आर्य अष्टांगिक मार्ग के सिद्धांतों के प्रतिपादन का प्रतीक मानी जाती है।
मंत्रालय ने बताया कि सारनाथ को वर्ष 1998 में यूनेस्को की संभावित विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था। जनवरी 2025 में इसके नामांकन का प्रस्ताव विश्व धरोहर समिति को भेजा गया था। लगभग 18 महीने चली तकनीकी समीक्षा, सलाहकार निकायों के साथ बैठकों और अंतरराष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल परिषद (आईकोमोस) के मूल्यांकन के बाद विश्व धरोहर समिति ने इसे विश्व धरोहर सूची में शामिल करने का निर्णय लिया।
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