वाराणसी , जुलाई 29 -- काशी के सारनाथ स्थित केंद्रीय उच्च तिब्बती अध्ययन संस्थान परिसर में आषाढ़ पूर्णिमा के अवसर पर बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ, नई दिल्ली एवं केंद्रीय उच्च तिब्बती अध्ययन संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में धम्मचक्कप्पवत्तन दिवस का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
अपने संबोधन में श्री मौर्य ने कहा कि भगवान बुद्ध का मध्यम मार्ग विश्व शांति, सद्भाव और मानव कल्याण का मार्ग है। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया भगवान बुद्ध के विचारों की प्रासंगिकता को स्वीकार कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र तथा उत्तर प्रदेश की डबल इंजन सरकार भगवान बुद्ध से जुड़े तीर्थ एवं विरासत स्थलों के समग्र विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध के विचारों के प्रति विश्व का आकर्षण लगातार बढ़ रहा है और सरकार बौद्ध स्थलों के विकास के साथ-साथ धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों को हरसंभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम का शुभारंभ अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ के महासचिव शार्त्से खेंसुर जंगचुप चोएडेन रिनपोछे के स्वागत भाषण से हुआ। इस अवसर पर केंद्रीय उच्च तिब्बती अध्ययन संस्थान के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर उपस्थित अतिथियों का मन मोह लिया।
बौद्ध परंपरा में आषाढ़ पूर्णिमा का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के सात सप्ताह बाद सारनाथ में अपना प्रथम उपदेश दिया था, जिसे पाली भाषा में धम्मचक्कप्पवत्तन सुत्त तथा संस्कृत में धर्मचक्र प्रवर्तन सूत्र कहा जाता है। इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में प्रतिवर्ष धम्मचक्कप्पवत्तन दिवस मनाया जाता है।
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