, Sept. 16 -- डॉ. कुमार ने कहा कि भारत जैसे विकासशील देशों के सामने तेज आर्थिक विकास को गति देने के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों से निपटने की दोहरी चुनौती है। उन्होंने कहा कि भारत की सभ्यतागत जीवन-दृष्टि सदैव प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व और संतुलन पर आधारित रही है।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि भारत ने वर्ष 2023 में पेरिस समझौते के तहत अपना प्रारंभिक 'एडप्टेशन कम्युनिकेशन' प्रस्तुत कर यह स्पष्ट किया है कि जलवायु अनुकूलन देश के विकास मॉडल का अभिन्न अंग है। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक रूप से कम उत्सर्जन करने वाले विकासशील देशों पर जलवायु संकट के असमानुपातिक बोझ को देखते हुए 'जलवायु न्याय' सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।

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