भोपाल , अप्रैल 13 -- मध्यप्रदेश पुलिस ने आधुनिक तकनीक और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली के माध्यम से अंतरराज्यीय सायबर अपराधों पर प्रभावी कार्रवाई करते हुए देवास, विदिशा, रतलाम और इटारसी में अलग-अलग मामलों में कई गिरोहों का पर्दाफाश किया है।
पुलिस के अनुसार देवास जिले में दर्ज एक प्रकरण में "ई-जीरो एफआईआर" प्रणाली के तहत कार्रवाई करते हुए अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह के दो आरोपियों को पश्चिम बंगाल के हावड़ा और दिल्ली से गिरफ्तार किया गया। आरोपियों ने "आरटीओ चालान" नामक संदिग्ध लिंक भेजकर मोबाइल हैक कर करीब 7 लाख 98 हजार रुपए की ठगी की थी। पुलिस ने उनके पास से 4 लाख 96 हजार 500 रुपए नगद और दो मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
पुलिस ने बताया कि "ई-जीरो एफआईआर" प्रणाली के तहत एक लाख रुपए से अधिक की साइबर ठगी की शिकायत 1930 हेल्पलाइन या राष्ट्रीय पोर्टल पर दर्ज होते ही तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी जाती है, जिससे ठगी गई राशि की रिकवरी की संभावना बढ़ जाती है।
विदिशा जिले के गंजबासोदा क्षेत्र में पुलिस ने पांच वर्षों से संचालित एक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ करते हुए मास्टरमाइंड सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपी "क्विकर जॉब" के नाम पर अभ्यर्थियों से पंजीयन, इंटरव्यू और जॉइनिंग किट के नाम पर राशि वसूलते थे। मौके से 20 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, 12 सिम कार्ड सहित अन्य सामग्री जब्त की गई।
रतलाम में "ऑपरेशन मैट्रिक्स" के तहत पुलिस ने मल्टी-स्टेट साइबर फ्रॉड में प्रयुक्त म्यूल अकाउंट का खुलासा कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। जांच में एक खाते में 47 लाख 75 हजार रुपए से अधिक की संदिग्ध राशि का लेनदेन सामने आया, जो तमिलनाडु के एक मामले से जुड़ा था।
इटारसी में पुलिस ने वर्क फ्रॉम होम टास्क के नाम पर ऑनलाइन ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों ने पहले छोटे भुगतान कर विश्वास जीता और बाद में लाखों रुपए की ठगी की।
मध्यप्रदेश पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध लिंक, कॉल या संदेश से सतर्क रहें और साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत 1930 हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
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