भोपाल , जून 18 -- मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने मध्यप्रदेश सरकार द्वारा गुना, रीवा और देवास जिलों के 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को निजी क्षेत्र के माध्यम से संचालित करने की पहल का विरोध करते हुए इसे वापस लेने की मांग की है।

माकपा के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने आज जारी बयान में आरोप लगाया कि सरकार का यह कदम स्वास्थ्य सेवाओं को महंगा बनाने और गरीब तथा सामान्य नागरिकों की पहुंच से दूर करने वाला है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के बजाय उन्हें निजी हाथों में सौंपने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश में कुपोषण और विभिन्न बीमारियों की स्थिति चिंताजनक है। उनके अनुसार सर्वेक्षण में बच्चों, महिलाओं और पुरुषों में कुपोषण तथा मोटापे से जुड़ी समस्याओं में वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता है।

माकपा नेता ने दावा किया कि प्रदेश के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों और विशेषज्ञों के स्वीकृत पदों का बड़ा हिस्सा रिक्त पड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की कमी के कारण अनेक मरीजों को जिला अस्पतालों के लिए रेफर करना पड़ता है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने, रिक्त पदों को भरने और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के बजाय स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण की दिशा में आगे बढ़ रही है। माकपा ने राज्य सरकार से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के निजीकरण संबंधी निर्णय को वापस लेने तथा रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्तियां करने की मांग की है।

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