उदयपुर , जुलाई 19 -- राजस्थान के उदयपुर में श्री जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक वासूपूज्य महाराज मंदिर ट्रस्ट, दादाबाड़ी में रविवार को साध्वी डॉ विद्युतप्रभा प्रज्ञाजंना का मंगल चातुर्मास प्रवेश भक्ति, श्रद्धा और धर्ममय वातावरण के बीच संपन्न हुआ।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने अगवानी कर साध्वीवृंद का स्वागत किया।
चातुर्मास प्रवेश के उपरांत आयोजित प्रथम प्रवचन में साध्वी डॉ विद्युतप्रभा ने कहा कि चातुर्मास केवल चार महीनों का प्रवास नहीं, बल्कि आत्मा के जागरण, आत्मचिंतन और आत्मशुद्धि का स्वर्णिम अवसर है। उन्होंने कहा कि मनुष्य अपने जीवन में संयम, सदाचार, क्षमा, करुणा और धर्म को अपनाये तो उसका जीवन सार्थक बन जाता है। बाहरी सुख क्षणिक हैं, जबकि आत्मिक शांति ही वास्तविक सुख है।
उन्होंने श्रद्धालुओं का चातुर्मास के दौरान अधिक से अधिक धर्म आराधना, स्वाध्याय, सामायिक, तप, त्याग और सेवा कार्यों में शामिल होने का आह्वन किया। उन्होंने कहा कि क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे कषायों का त्याग करके प्रेम, विनम्रता और सद्भाव का मार्ग अपनाना ही सच्ची साधना है।
साध्वी विद्युत् प्रभा ने बताया कि वर्ष 2027 में फरवरी में हैदराबाद में निर्माणाधीन माणिक्य महोत्सव दादा आदिनाथ भगवान के मंदिर को 1400 वर्ष पूर्ण होने जा रहे हैं। उसी उपलक्ष्य में माणिक्य स्वामी तप (कुलपाक तीर्थ निमित्त) के तहत 14 उपवास रहेंगे, जो 28 जुलाई से प्रारंभ होंगे। 25 अगस्त को 29 वें दिन ये तप पूर्ण होगा। एक दिन उपवास एक दिन बीयासना का रहेगा।
ट्रस्ट अध्यक्ष राज लोढ़ा ने बताया कि इससे पूर्व नगर निगम प्रांगण (टाउन हॉल) से नवकारसी के पश्चात हाथी, घोड़े, बैंड-बाजों, ढोल-नगाड़ों एवं सैकड़ों श्रावक- श्राविकाओं की उपस्थिति में भव्य शोभायात्रा निकाली गयी। शोभायात्रा टाउन हॉल से प्रारंभ होकर शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए सूरजपोल चौराहा होते हुए दादावाड़ी पहुंची।
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