अल्मोड़ा , जून 11 -- उत्तराखंड में अल्मोड़ा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) चंद्रशेखर घोड़के ने लोगों से अपील की है कि साइबर धोखाधड़ी का शिकार होने पर बिना समय गंवाये 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। त्वरित शिकायत से रकम को अपराधियों के खाते में फ्रीज कराने और वापस पाने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
श्री घोड़के ने गुरुवार को कहा कि साइबर ठगी के मामलों में पीड़ितों को राहत देने के लिए केन्द्र सरकार के गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र ने बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) के तहत "मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल (एमआरएम)" पोर्टल को लाइव कर दिया गया है, जिसके माध्यम से साइबर धोखाधड़ी के शिकार लोग अब घर बैठे अपनी होल्ड (फ्रीज) कराई गई धनराशि वापस पाने के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।
एसएसपी घोड़के ने बताया कि नई डिजिटल और पारदर्शी व्यवस्था लागू होने के बाद पीड़ितों को धनवापसी के लिए पुलिस कार्यालयों और बैंकों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। अब नागरिक स्वयं ऑनलाइन रिफंड का अनुरोध दर्ज कर सकेंगे और प्रक्रिया पूरी होने पर राशि सीधे उनके बैंक खाते में वापस भेज दी जाएगी।
इस सुविधा का लाभ केवल वे लोग उठा सकेंगे जिन्होंने साइबर ठगी के बाद समय रहते 1930 हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई हो तथा उन्हें 14 अंकों का रजिस्टर्ड पावती संख्या प्राप्त हुआ हो। साथ ही, ठगी की गई धनराशि अपराधियों के बैंक खातों में फ्रीज (होल्ड) कराई गई हो।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जिन मामलों में ठग रकम निकाल चुके हैं, उन मामलों में यह पोर्टल लागू नहीं होगा। केवल होल्ड की गई धनराशि की वापसी के लिए ही यह व्यवस्था बनाई गई है।
उन्होंने कहा कि यदि एक बैंक खाते में होल्ड राशि 50 हजार रुपये तक है, तो प्राथमिकी या अदालत के आदेश की आवश्यकता नहीं होगी। पुलिस रिपोर्ट और इंडेम्निटी बॉन्ड के आधार पर सीधे रिफंड किया जाएगा। यदि कुल होल्ड राशि 50 हजार रुपये से अधिक है लेकिन अलग-अलग खातों में 50 हजार रुपये से कम है, तब भी प्राथमिकी या अदालत आदेश जरूरी नहीं होगा और पुलिस आख्या के आधार पर रिफंड मिल सकेगा।
इनके अतिरिक्त यदि किसी एक बैंक खाते में 50 हजार रुपये से अधिक की राशि होल्ड है, तो प्राथमिकी दर्ज होना अनिवार्य होगा। इसके बाद आगे की कार्रवाई इसी पोर्टल के माध्यम से की जाएगी।
उन्होंने कहा कि पीड़ितों को एमआरएम पोर्टल पर जाकर अपनी 14 अंकों की शिकायत आईडी दर्ज करनी होगी। पंजीकृत मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी से लॉगिन करने के बाद होल्ड की गई राशि की जानकारी स्क्रीन पर दिखाई देगी। इसके बाद बैंक खाता संख्या, आईएफएससी कोड और पैन कार्ड अपलोड कर आवेदन सबमिट करना होगा। आवेदन जमा होने पर एक यूनिक रिक्वेस्ट आईडी जारी होगी, जिसके जरिए रिफंड की स्थिति ट्रैक की जा सकेगी।
एसएसपी ने नागरिकों से अपील की है कि पूरी प्रक्रिया निःशुल्क और पारदर्शी है। रिफंड दिलाने के नाम पर किसी दलाल या अज्ञात व्यक्ति को पैसा न दें। केवल अधिकृत सरकारी पोर्टल का ही उपयोग करें और किसी भी फर्जी लिंक या कॉल से सावधान रहें।
उन्होंने कहा कि यदि किसी को ऑनलाइन आवेदन में दिक्कत आती है तो वह अपने नजदीकी थाने या साइबर सेल से निःशुल्क सहायता प्राप्त कर सकता है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित