देहरादून , जून 09 -- | उत्तराखण्ड में साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के लिए विशेष कार्य बल (एसटीएफ) ने सख्त कदम उठाते हुए साइबर ठगों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। साथ ही प्रतिदिन प्राप्त होने वाली शिकायतों के त्वरित और प्रभावी निस्तारण के लिए एक विशेष फॉलो-अप टीम का गठन किया गया है।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री के 'देवभूमि को अपराध मुक्त बनाने' के संकल्प के तहत पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ के निर्देशन में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, एसटीएफ द्वारा साइबर अपराध पीड़ितों को शीघ्र न्याय दिलाने और अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी क्रम में एसटीएफ के अधीन संचालित राष्ट्रीय वित्तीय हेल्पलाइन 1930 कंट्रोल रूम को साइबर ठगी के मामलों में पीड़ितों की धनराशि को शीघ्र होल्ड कर सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए। इसके परिणामस्वरूप मई 2026 के दौरान विभिन्न माध्यमों से ठगी गई कुल 2.24 करोड़ रुपये की धनराशि को सुरक्षित रखने एवं आंशिक रूप से वापस कराने में सफलता मिली है।

एसटीएफ द्वारा हेल्पलाइन की कार्यक्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से गठित फॉलो-अप टीम ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। टीम ने न केवल ठगी गई राशि को समय रहते होल्ड कराया, बल्कि अतिरिक्त प्रयास करते हुए विभिन्न बैंक खातों में फंसी धनराशि को न्यायालय के रिलीज आदेश के माध्यम से संबंधित नोडल अधिकारियों को भेजकर पीड़ितों के खातों में 7.74 लाख रुपये वापस कराए।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, एसटीएफ अजय सिंह ने आम जनता से अपील की है कि वे अपने बैंक खाते किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग केे लिए न दें। कमीशन या किराये पर खाता देना दंडनीय अपराध है। एटीएम कार्ड, ओटीपी, पिन या यूपीआई पिन जैसी गोपनीय जानकारी किसी से साझा न करें। उन्होंने चेतावनी दी कि अज्ञात नंबरों से आने वाली वीडियो कॉल या संदिग्ध कॉल से सावधान रहें और किसी भी प्रकार की निजी जानकारी साझा न करें। यदि कोई व्यक्ति स्वयं को पुलिस, सीबीआई या ईडी का अधिकारी बताकर 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर डराने का प्रयास करता है, तो ऐसे मामलों में घबराने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि कोई भी एजेंसी ऑनलाइन गिरफ्तारी नहीं करती।

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