नैनीताल , अगस्त 12 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने 38वें राष्ट्रीय खेलों के दौरान अपेक्षित सहयोग नहीं करने के आधार पर देहरादून स्थित साइबर ट्रेज़री के मुख्य कोषाधिकारी भास्करानंद पांडे की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) डाउनग्रेड किए जाने के मामले में राज्य सरकार से संबंधित प्रतिकूल सामग्री पेश करने को कहा है।
अदालत ने याचिकाकर्ता की ओर से विगत 27 जुलाई को दिए गए प्रत्यावेदन पर भी सक्षम प्राधिकारी को निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने यह आदेश भास्करानंद पांडे की याचिका पर 10 अगस्त को सुनवाई के दौरान पारित किये।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि 38वें राष्ट्रीय खेलों के आयोजन के दौरान याचिकाकर्ता ने अपेक्षित सहयोग नहीं किया था। उस समय याचिकाकर्ता पीआरडी के वित्त अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे थे। हालांकि, कोर्ट ने पाया कि इन प्रतिकूल टिप्पणियों को दर्ज करने का आधार बनने वाली सामग्री उसके समक्ष पेश नहीं की गई है।
राज्य सरकार के अधिवक्ता ने इस सामग्री को रिकॉर्ड पर पेश करने के लिए कोर्ट से अतिरिक्त समय मांगा। साथ ही बताया गया कि याचिकाकर्ता ने 27 जुलाई 2026 को प्रतिकूल प्रविष्टि के खिलाफ प्रत्यावेदन भी दिया है, लेकिन उसके निस्तारण की स्थिति की जानकारी उन्हें नहीं है।
इस पर हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि याचिकाकर्ता के 27 जुलाई के प्रत्यावेदन पर अभी तक निर्णय नहीं हुआ है तो सक्षम प्राधिकारी उसका निस्तारण करे और अगली सुनवाई पर निर्णय कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। इसके अलावा राज्य के स्थायी अधिवक्ता को याचिकाकर्ता की एसीआर डाउनग्रेड किए जाने के आधार में शामिल प्रतिकूल सामग्री भी रिकॉर्ड पर पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।
मामले की अगली सुनवाई आगामी 17 अगस्त को होगी। कोर्ट नेडीपीसी की बैठक पर लगी रोक को अगली तारीख तक बढ़ा दिया है।
याचिकाकर्ता की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि उच्च वेतनमान दिए जाने के संबंध में दो जुलाई 2026 को विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक होनी थी, लेकिन बैठक स्थगित हो गई। उस समय रिपोर्टिंग और रिव्यूइंग अथॉरिटी ने एक जुलाई 2024 से 31 मार्च 2025 की अवधि के लिए उनके कार्य प्रदर्शन को 9.5 अंक दिए थे।
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