पटना , जनवरी 30 -- कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार के अंतर्गत भारतीय नृत्य कला मंदिर की ओर से शुक्रवार को सांस्कृतिक संध्या "शुक्रगुलज़ार" कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) आलोक राज का स्वागत भारतीय नृत्य कला मंदिर की प्रशासी पदाधिकारी सुश्री कहकशां ने पुष्पगुच्छ प्रदान कर किय। इसके बाद 'स्वरसाधना ग्रुप' का भी पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया गया।

कार्यक्रम की पहली प्रस्तुति 'स्वरसाधना ग्रुप' द्वारा विद्यापति रचित नाचारी रचना "कखन हरम दुखवा हमार हे भोलेनाथ" से हुई, जिसने दर्शकों को भक्तिमय वातावरण में सराबोर कर दिया। इसके बाद झूमरों की श्रृंखला में "झूमर ला दो हे बलम", स्त्री की विरह वेदना पर आधारित पूर्वी झूमर तथा "चौपट बलमुआ" जैसी एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियों ने सभागार में तालियों की गड़गड़ाहट और उत्साह का वातावरण बना दिया।

कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति में वसंत ऋतु के उल्लास को दर्शाती "धमार" की प्रस्तुति देकर कलाकारों ने वसंत का मान बढ़ाया और कार्यक्रम को यादगार बना दिया।

बिहार के पूर्व डीजीपी आलोक राज ने अपने जीवन यात्रा के अनुभव साझा किए और बताया कि किस प्रकार उन्होंने पुलिस सेवा प्रणाली से शास्त्रीय संगीत की ओर अपना रुझान विकसित किया। उनकी पहली प्रस्तुति भगवान श्रीकृष्ण के विरह और प्रेम से सराबोर भजन "बाट निहारे घनश्याम" से हुई। इसके बाद "आज वहीँ गीतों की रानी" तथा दुष्यंत कुमार की प्रसिद्ध ग़ज़ल "मैं जिसे ओढ़ता बिछाता हूँ" गजल सम्राट जगजीत सिंह का प्रसिद्ध गजल"प्यार का पहला खत लिखने में" सहित अन्य रचनाओं ने श्रोताओं का मन मोह लिया।

कार्यक्रम में कला एवं संस्कृति विभाग के सचिव प्रणव कुमार, भारतीय नृत्य कला मंदिर की प्रशासी पदाधिकारी सुश्री कहकशां , भारतीय नृत्य कला मंदिर के शिक्षक-शिक्षिकाएँ, छात्र-छात्राएँ तथा सैकड़ों संगीत प्रेमी और श्रोता उपस्थित थे।

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