सारंगढ़-बिलाईगढ़ , अगस्त 17 -- सांप का नाम आते ही आमतौर पर मन में फुफकारते जहरीले नाग की भयावह तस्वीर उभरती है, लेकिन छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के सरिया क्षेत्र में एक ऐसी बस्ती है, जहां सांप डर का नहीं, बल्कि पीढ़ियों से आजीविका और परंपरा का हिस्सा हैं। यहां छोटे बच्चों के लिए भी सांप अनजाने नहीं हैं और परिवारों की रोजी-रोटी भी काफी हद तक इसी पारंपरिक पेशे से जुड़ी हुई है।
नाग पंचमी के अवसर पर सरिया तहसील के ग्राम भीकमपुर स्थित सपेरा बस्ती की जिंदगी और परंपराएं विशेष ध्यान खींचती हैं। भीकमपुर गौशाला के समीप पिछले करीब 40 वर्षों से सपेरा समुदाय के परिवार निवास कर रहे हैं। अनुसूचित जनजाति वर्ग से आने वाले इन परिवारों के लिए सांप पकड़ने और उन्हें दिखाने की परंपरा लंबे समय से आजीविका का साधन रही है।
समुदाय में सांप केवल रोजगार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सामाजिक परंपराओं से भी जुड़े हुए हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, यहां विवाह के दौरान बेटी को दहेज के रूप में नौ सांप देने की पुरानी परंपरा रही है। हालांकि शिक्षा और बदलते समय के साथ समुदाय की जीवनशैली और कई पुरानी परंपराओं में धीरे-धीरे बदलाव भी आ रहा है।
नाग पंचमी पर सपेरा परिवारों के अधिकांश सदस्य आसपास और दूरदराज के क्षेत्रों में सांप दिखाने के लिए निकले हुए हैं। समुदाय के प्रभु दयाल सिदार ने बताया कि सांपों से जुड़ा काम उनका परंपरागत व्यवसाय है और इसी के माध्यम से परिवार का भरण-पोषण होता आया है।
उन्होंने बताया कि शिक्षा और जागरूकता बढ़ने के साथ समुदाय की जीवनशैली भी बदल रही है। पहले परिवार जमीन पर सोते थे, लेकिन अब चारपाई सहित दूसरी सामान्य घरेलू सुविधाओं का इस्तेमाल बढ़ा है। इसके बावजूद स्थायी और सुविधायुक्त आवास की जरूरत अभी भी समुदाय की प्रमुख अपेक्षाओं में शामिल है।
सपेरा समुदाय के लोगों का कहना है कि भूमिहीन होने और आवश्यक दस्तावेजों की समस्या के कारण जाति प्रमाणपत्र बनवाने में उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसका असर स्कूली बच्चों पर भी पड़ता है और विद्यार्थियों को शैक्षणिक एवं अन्य सरकारी सुविधाओं से संबंधित प्रक्रियाओं में कठिनाई होती है।
पिछले दिनों मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और वित्त मंत्री ओपी चौधरी भी सपेरा बस्ती पहुंचे थे और समुदाय की समस्याओं की जानकारी ली थी। मुख्यमंत्री ने यहां निर्माणाधीन आवासों का अवलोकन भी किया था। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बस्ती के करीब 40 परिवारों के लिए आवास निर्माण का कार्य प्रगति पर है।
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