सहारनपुर , अक्टूबर 17 -- बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के राष्ट्रीय प्रभारी के रूप में फिर जिम्मेदारी संभाल रहे आकाश आनंद के कौशल और चुनावी रणनीति की परीक्षा दो नवंबर को सहारनपुर के सरसावा में प्रस्तावित रैली में होगी।

पार्टी के पुराने और नए कार्यकर्ता संगठन को मजबूत करने तथा आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं। रैली में कुछ विधानसभा सीटों के प्रत्याशियों के नामों की घोषणा भी किए जाने की संभावना है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश का अनुसूचित जाति बहुल सहारनपुर जिला बसपा संस्थापक कांशीराम और पार्टी अध्यक्ष मायावती की राजनीति का प्रमुख केंद्र रहा है। मायावती चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। हालांकि, 2012 के बाद प्रदेश में बसपा का राजनीतिक प्रभाव लगातार कमजोर हुआ है। अब मायावती ने आकाश आनंद को आगे कर संगठन को फिर मजबूत करने की कोशिश तेज की है।

बसपा के सहारनपुर और मुरादाबाद मंडल के समन्वयक जाफर मलिक ने शनिवार को बताया कि मुरादाबाद मंडल की 27 में से नौ सीटों और सहारनपुर मंडल की नौ सीटों के प्रत्याशियों के नामों पर मायावती की मंजूरी मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि पार्टी 15 नवंबर तक सभी प्रत्याशियों के नाम घोषित करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। प्रत्येक सीट पर कई दावेदार होने के कारण चयन प्रक्रिया में समय लग रहा है।

सहारनपुर के बसपा प्रभारी जनेश्वर प्रसाद के अनुसार, सरसावा रैली में सहारनपुर देहात से फिरोज आफताब, बेहट से राजपूत नेता रोहित सिंह राणा और नकुड़ से नरेश सैनी की उम्मीदवारी घोषित की जा सकती है। आरक्षित रामपुर मनिहारान सीट से पालिकाध्यक्ष रेणु के पति कुलदीप सिंह और पूर्व गृह मंत्री रामसिंह मांडे बांस के बेटे अनिल कुमार के नामों पर विचार चल रहा है। देवबंद सीट के लिए उपयुक्त प्रत्याशी की तलाश जारी है। सहारनपुर नगर और गंगोह सीटों पर भी जल्द फैसला होने की उम्मीद है।

बसपा के सामने संगठन को दोबारा मजबूत करने के साथ सामाजिक समीकरण साधने की चुनौती भी है। मायावती के कार्यकाल में विधायक रहे रविंद्र मोल्लू, जगपाल सिंह, डॉ. धर्मसिंह सैनी और महिपाल माजरा अब भाजपा में हैं। वहीं, 2007 में राजपूत नेता राजेंद्र सिंह राणा को हराने वाले मनोज चौधरी अब सपा से देवबंद सीट पर दावेदारी कर रहे हैं।

बसपा का पारंपरिक जनाधार अब भी पार्टी की उम्मीदों का आधार है, लेकिन मुस्लिम मतदाताओं का रुझान सपा और कांग्रेस की ओर होने की चुनौती भी उसके सामने है। ऐसे में दो नवंबर की सरसावा रैली को आकाश आनंद के नेतृत्व, संगठनात्मक क्षमता और चुनावी रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रैली से यह संकेत मिलने की उम्मीद है कि बसपा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपना राजनीतिक आधार फिर मजबूत करने के लिए किस दिशा में आगे बढ़ेगी।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित