सहारनपुर , सितंबर 7 -- उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद हटाये गये मलबे के नीचे मिले कुएं में मंदिर होने की संभावना को पुरातत्व विभाग ने साक्ष्यों के अभाव में नकार दिया है। राज्य पुरातत्व विभाग के सहायक पुरातत्व अधिकारी मनोज कुमार यादव ने रविवार को यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा कि कुएं में मंदिर होने की चर्चा के संबंध में जब तक कोई प्रामाणिक साक्ष्य नहीं मिलता, तब तक इस बारे में कुछ भी कहना संभव नहीं है। उन्होंने कहा, "संभावनाओं के आधार पर इतिहास नहीं लिखा जा सकता।"श्री यादव ने बताया कि कुआं करीब 200 से 250 वर्ष पुराना प्रतीत होता है। इसकी संरचना सुर्खी-चूने से निर्मित है। कुएं की गहराई करीब 20 फीट और व्यास लगभग तीन फीट है। इसमें लगी लाखौरी ईंटों का आकार करीब 20, 10 और पांच सेंटीमीटर है।

उन्होंने बताया कि ईंटों के निर्माण और उपयोग का अलग-अलग कालक्रम रहा है। मौर्यकाल की ईंटें अलग प्रकार की थीं, जबकि गुप्त राजवंश के समय ईंटों की बनावट अलग थी। मध्यकाल में लाखौरी ईंटों का प्रचलन हुआ।

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