सहारनपुर , फरवरी 16 -- उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में भाजपा जिलाध्यक्ष पद की नई नियुक्ति को लेकर लंबे समय से गतिरोध बना हुआ है। बताया जा रहा है कि पार्टी के प्रमुख नेताओं के बीच समन्वय न बन पाने के कारण यह स्थिति बनी हुई है। वर्ष 2023 में तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी की नियुक्ति से जिलाध्यक्ष बने महेंद्र सैनी अब तक तीन-तीन वर्ष के दो कार्यकाल और अतिरिक्त चार माह का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं।

सूत्रों के अनुसार संगठन महामंत्री धर्मपाल सैनी का समर्थन महेंद्र सैनी के लंबे कार्यकाल में सहायक रहा। वहीं नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के समक्ष इस गतिरोध को समाप्त करने की चुनौती है। लोकसभा चुनाव 2024 में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा को अपेक्षित सफलता न मिलने के बाद जिला संगठन में बदलाव की मांग तेज हो गई है।

पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं-जिनमें गंगोह विधायक चौधरी कीरत सिंह, पूर्व सांसद प्रदीप चौधरी, पूर्व सांसद राघव लखनपाल शर्मा, पूर्व विधायक नरेश सैनी, राज्यमंत्री जसवंत सिंह सैनी, विधायक मुकेश चौधरी और जिला पंचायत अध्यक्ष मांगेराम चौधरी शामिल बताए जाते हैं-ने चुनाव अधिकारी को पत्र भेजकर जिला उपाध्यक्ष अजीत सिंह राणा (राजपूत बिरादरी) को जिलाध्यक्ष बनाने की मांग की है। उनका तर्क है कि आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए सामाजिक समीकरणों के अनुरूप नेतृत्व परिवर्तन आवश्यक है।

हालांकि पार्टी के भीतर ही मतभेद भी सामने आ रहे हैं। चर्चा है कि देवबंद विधायक बृजेश रावत इस प्रस्ताव से सहमत नहीं हैं, जिससे नियुक्ति में विलंब हो रहा है। संगठन की निष्क्रियता और आपसी खींचतान को हालिया चुनावी प्रदर्शन से भी जोड़ा जा रहा है।

विधानसभा चुनाव में अब एक वर्ष से भी कम समय शेष है। ऐसे में कार्यकर्ताओं की नजरें प्रदेश नेतृत्व के निर्णय पर टिकी हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि संगठनात्मक गतिरोध शीघ्र समाप्त न हुआ तो इसका असर आगामी चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है।

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