सहारनपुर , मार्च 12 -- सहारनपुर स्थित मां शाकुम्बरी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. डॉ. विमला वाई ने कहा है कि विश्वविद्यालय सहारनपुर के औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र को आर्टिकल्चर (औद्यानिक) महाविद्यालय के रूप में विकसित करने की पहल कर रहा है। इसके लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा। उन्होंने बताया कि सहारनपुर के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता एवं पूर्व मंत्री संजय गर्ग ने इस संबंध में उन्हें प्रस्ताव दिया है, जिससे वह सहमत हैं और अपने स्तर से इसके लिए प्रयास करेंगी।
संजय गर्ग के अनुसार औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना वर्ष 1950 में हुई थी। वर्ष 1974 में प्रदेश के उद्यान विभाग के गठन के बाद इसे विभाग को हस्तांतरित कर दिया गया और 1976 में इसे प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र के रूप में परिवर्तित कर दिया गया। केंद्र का कुल क्षेत्रफल लगभग 154.6 एकड़ है, जिसमें करीब 75 एकड़ क्षेत्र में विभिन्न प्रजातियों की औद्यानिक फसलों और वनस्पतियों के लगभग 2750 मातृ वृक्षों का जर्म प्लाज्मा संरक्षित है।
केंद्र परिसर में लगभग 12 एकड़ क्षेत्र में कार्यालय, आवासीय भवन, प्रशिक्षण केंद्र, छात्रावास और अतिथिगृह आदि हैं। इसके अलावा लगभग 11 किलोमीटर आंतरिक सड़कें, सिंचाई नालियां, पांच हजार रनिंग मीटर बाहरी दीवार और चार मुख्य द्वारों का रखरखाव भी किया जाता है।
श्री गर्ग ने बताया कि इस विषय में पहले भी मुख्यमंत्री को पत्र भेजा जा चुका है और सहारनपुर के मंडलायुक्त द्वारा भी प्रदेश के मुख्य सचिव को विस्तृत प्रस्ताव भेजा गया था।
कुलपति डॉ. विमला वाई ने कहा कि यदि इस पहल को मंजूरी मिलती है तो इससे विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण कृषि और औद्यानिक शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा तथा क्षेत्र के किसानों, युवाओं और स्वयं सहायता समूहों को भी प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। इससे राज्य सरकार की आत्मनिर्भरता और ग्रामीण आर्थिक सशक्तिकरण की नीति को भी बल मिलेगा।
उन्होंने कहा कि सहारनपुर मंडल कृषि और फल-फूल उत्पादन के लिहाज से समृद्ध क्षेत्र है, जहां आम, लीची, अमरूद, सब्जियों और पुष्पों की खेती की अपार संभावनाएं हैं। किसानों को वैज्ञानिक आधार और आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराने के लिए विश्वविद्यालय में औद्यानिक विभाग के विकास और अनुसंधान गतिविधियों के विस्तार की आवश्यकता है।
कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर में औद्यानिक शिक्षण, अनुसंधान, डेमो फार्म, नर्सरी, प्रशिक्षण केंद्र और आधुनिक प्रयोगशालाओं की स्थापना के लिए अतिरिक्त भूमि खरीदने का मामला भी विचाराधीन है। इसके लिए विश्वविद्यालय पूर्व में भी शासन से कृषि संकाय शुरू करने की मांग कर चुका है।
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