बारां , अक्टूबर 28 -- राजस्थान में बारां जिला प्रशासन द्वारा संचालित सामर्थ्य-सक्षम सखी अभियान ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
सहरिया जनजाति की महिलाओं द्वारा तैयार वनोपज आधारित उत्पादों को अब राष्ट्रीय स्तर के बाजार में पहचान मिली है।
आधिकारिक सूत्रों ने जिला परियोजना प्रबंधन इकाई, राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर बताया कि महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों की बिक्री का शुभारंभ बारां जिले के डी-मार्ट स्टोर से किया गया है। जल्द ही हाड़ौती क्षेत्र के सभी डी-मार्ट स्टोर्स में इन उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
यह पहल जिला कलक्टर बालमुकुंद असावा के निर्देशन में जनजाति विभाग, केवीके अंता और राजीविका के संयुक्त प्रयासों से की जा रही है। खुशालपुरा में चिरौंजी प्रसंस्करण इकाई, केवीके में शहद प्रसंस्करण इकाई और जिला मुख्यालय पर ग्राम श्री मार्ट की स्थापना से धनिया, मिर्च, हल्दी, मसाले, अचार, आंवला कैंडी, चिरौंजी और शहद जैसे उत्पादों की ब्रांडिंग और पैकेजिंग करके बाजार से जोड़ा जा रहा है।
इस अभियान के तहत अब तक कुल क़रीब 77 लाख रुपए की बिक्री की जा चुकी है। वर्तमान में जिले में 80 वन धन विकास केंद्र सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं, जिनसे करीब 72 लाख रुपए महीने की स्थायी बाजार मांग सृजित हुई है।
इस पहल से सहरिया महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जहां पहले उनकी आय करीब 200 रुपए प्रतिदिन तक सीमित थी, वहीं अब चयनित सक्रिय महिला उद्यमी आठ हजार से 10 हजार रुपए हर महीने तक की नियमित आय अर्जित कर रही हैं।
सूत्रों ने बताया कि आगामी वित्त वर्ष 2026-27 में इस बिक्री को दो करोड़ रुपए तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए करीब एक करोड़ रुपए की अतिरिक्त मशीनरी स्थापित की जाएगी। 217 स्वयं सहायता समूहों के लिए 10 करोड़ रुपए के रियायती ऋण की व्यवस्था और 957 महिलाओं को लखपति दीदी बनाने के उद्देश्य से आठ करोड़ रुपए की सहायता पर कार्य किया जाएगा।
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