पटना , फरवरी 23 -- बिहार में रोजगार बढ़ाने के लिये सहकारिता के क्षेत्र में गुजरात के सफल मॉडल का अध्ययन कर उसे लागू किया जायेगा, जिसमें सहकारिता आधारित खेती समेत विभिन्न अवसरों के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया जायेगा।
यह जानकारी सोमवार को सहकारिता विभाग की ओर से संवाद कक्ष में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में विभागीय मंत्री डॉ प्रमोद कुमार ने दी।
मंत्री डॉ कुमार ने कहा कि बिहार में सहकारिता आधारित खेती की असीम संभावनायें हैं, विशेषकर छोटे- छोटे खेती के रकबे और गया जी में तिलकुट उत्पादन जैसे क्षेत्रों में। उन्होंने बताया कि भंडारण और सहकारिता समितियों के गठन के माध्यम से भी रोजगार सृजन पर काम किया जा रहा है।
सहकारिता विभाग के सचिव धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि राज्य में वर्तमान में लगभग 28,000 सहकारी समितियां कार्यरत हैं और निकट भविष्य में यह संख्या और बढ़ेगी। प्रखंड स्तर पर शहद और मखाना उत्पादक समितियों का गठन किया जा रहा है। पैक्सों को मल्टी सर्विस सेंटर के रूप में विकसित किया जा रहा है और 4,477 पैक्सों को कंप्यूटरीकृत किया जा चुका है।
मंत्री डॉ कुमार ने बताया कि खरीफ विपणन मौसम 2025-26 में 6,879 समितियों के जरिये 4.28 लाख किसानों से 29.22 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदारी हो चुकी है, जबकि कुल लक्ष्य 36.85 लाख मीट्रिक टन है। किसानों को 6,400 करोड़ रुपये न्यूनतम समर्थन मूल्य के रूप में उनके खाते में भुगतान किये जा चुके हैं।
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